राजस्थान सियासी घमासान के बीच राज्यपाल कलराज मिश्र विधानसभा सत्र को बुलाने की अनुमति दे दी है. हालांकि, राज्यपाल ने सत्र को बुलाए जाने को लेकर कुछ शर्तें रखी है. राजभवन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि, विधानसभा सत्र न बुलाने की कोई भी मंशा राजभवन की नहीं है. राज्यपाल द्वारा संवैधानिक और नियमावलियों में विहित प्रक्रिया और प्राविधानों के अनुरूप ही कार्य किये जाने का निश्चय दोहराया गया है.

विधानसभा सत्र के लिए 21 दिन का नोटिस

राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, राज्यपाल की सलाह है कि विधानसभा सत्र के लिए 21 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए. कोरोना वायरस की महामारी के दौरान सभी विधायकों को अल्प सूचना पर कॉल करना मुश्किल होगा "क्या आप विधायकों को 21 दिन का नोटिस देने पर विचार कर सकते हैं?"

विश्वास मत हासिल करने की परिस्थिति में लाइव प्रसारण

राजभवन के बयान में कहा गया है कि, अगर किसी भी परिस्थिति में विश्वास मत हासिल करने की नौबत आती है तो कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग करायी जाए और विश्वास मत हो या नहीं हो ये बटन के माध्यम से फैसला किया जाए. यह भी सुनिश्चित किया जाये कि ऐसी स्थिति में विश्वास मत का लाइव प्रसारण किया जाए.

इसके साथ ही कहा गया है कि, कोरोना से बचने के लिए 200 विधायकों और कम से कम 100 अधिकारियों की सोशल डिस्टेंसिंग के इंतजामों का खयाल रखा जाए.

बता दें इससे पहले राज्यपाल कलराज मिश्र ने सीएम अशोक गहलोत के पहले प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि प्रस्ताव में एजेंडे का उल्लेख नहीं है और तरीख भी तय नहीं है.