दो जून को पुलवामा के त्राल में आतंकियों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक पार्षद राकेश पंडिता की हत्या कर दी. इस घटना की सभी पार्टियों के नेता ने निंदा की. बीजेपी पार्षद की हत्या पर उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा, पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती और जम्मू कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस नेता सज्जाद लोन ने दुख व्यक्त किया.

बता दें कि ये पहला मौका नहीं था, जब बीजेपी नेता की कश्मीर में आतंकियों ने हत्या की हो.

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* जुलाई 2020 में आतंकियों ने कश्मीर के बांदीपोरा जिला के पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष वसीम बारी की हत्या की थी. इस हमले में वसीम बारी के पिता और भाई भी मारे गए थे.

* अक्तूबर 2020 में आतंकियों ने तीन बीजेपी कार्यकर्ता फिदा हुसैन याटू, उमर सिंह राशिद और उमर रमजान हजाम को मौत के घाट उतारा था.

अगस्त 2020 में कश्मीर के बड़गाम में बीजेपी कार्यकर्ता हामिद नजर की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इससे कुछ दिन पहले ही सज्जाद अहमद खांडे नाम के एक बीजेपी कार्यकर्ता व सरपंच की हत्या कर दी गयी थी. 

मई 2019 में अनंतनाग जिले के 60 वर्षीय बीजेपी जिला अध्यक्ष गुल मोहम्मद मीर की आतंकियों ने हत्या कर दी थी. 

अगस्त 2018 में पुलवामा में बीजेपी नेता शब्बीर अहमद बट को आतंकियों ने अगवा करके मौत के घाट उतार दिया था.  

नवंबर 2017 में बीजेपी के शोपियां जिले के अध्यक्ष गौहर अहमद बट की गला काटकर हत्या कर दी गई थी. 

बता दें कि इस फेहरिस्त में कई और बीजेपी समर्थक और नेताओं के भी नाम हैं. बीजेपी नेताओं पर हमले जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद से बढ़े हैं. 

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