नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच संक्रमण के उपचार के लिए दवाओं की बढ़ रही मांग के मद्देनजर सरकार के शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि विषाणु रोधी दवा ‘रेमडेसिविर’ कोई ‘जादुई गोली’ नहीं है और यह मृत्युदर को कम नहीं करती।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने मीडिया से कहा कि ‘रेमडेसिविर’ केवल उन्हीं रोगियों को दी जानी चाहिए, जो संक्रमण के मध्यम स्तर के साथ अस्पताल में भर्ती हैं और जिनके शरीर में ऑकसीजन सांद्रता कम हो तथा एक्स-रे और सीटी-स्कैन के अनुसार जिनकी छाती में वायरस की घुसपैठ दिखती हो।

उन्होंने कहा, ‘‘रेमडेसिविर कोई जादुई गोली नहीं है और यह कोई ऐसी दवा नहीं है जो मृत्यु दर को कम करती हो। हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि हमारे पास कोई बहुत अच्छी विषाणु रोधी दवा नहीं है। इसकी सीमित भूमिका है और हमें इसका इस्तेमाल अत्यंत सावधानी से करना चाहिए।’’

गुलेरिया ने कहा, ‘‘ज्यादातर अध्ययनों में, रेमडेसिविर अस्पतालों में भर्ती केवल उन रोगियों के उपचार में उपयोगी दिखी जिनके शरीर में ऑक्सीजन सांद्रता कम थी तथा एक्स-रे और सीटी-स्कैन के अनुसार जिनकी छाती में वायरस की घुसपैठ दिखी। यदि इसे हल्के लक्षणों की शुरुआत में दिया जाए, या लक्षणमुक्त रोगियों को दिया जाए या फिर इसे बहुत देर से दिया जाए तो यह किसी काम की नहीं है।’’

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने कहा कि ‘रेमडेसिविर’ घर में नहीं दी जाती और यह मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए नहीं है।

उन्होंने गुलेरिया की टिप्पणी के समर्थन में कहा कि ‘रेमडेसिवर’ कोविड-19 संबंधी मृत्युदर को कम नहीं करती।

गुलेरिया ने यह भी कहा कि अध्ययनों से पता चला है कि कोविड-19 के उपचार में प्लाज्मा पद्धति की भी सीमित भूमिका है।

पॉल ने कोरोना वायरस के हवा से फैलने संबंधी नए अध्ययन के बारे में कहा, ‘‘नयी बात सीखने के लिये यह बहुत ही गतिशील स्थिति है।’’

नयी जानकारी के संबंध में सावधानियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वायरस के प्रसार को रोकने में मास्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उचित दूरी बनाए रखने के साथ ही बंद स्थलों पर हवा के बाहर निकलने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।