मुंबई, 19 अप्रैल (भाषा) शिवसेना ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कथित जमाखोरी और निर्यात को लेकर मुंबई पुलिस द्वारा एक फार्मा कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ पर आपत्ति जताए जाने को लेकर सोमवार को भाजपा नेताओं देवेन्द्र फडणवीस और प्रवीण दारेकर की आलोचना की और जानना चाहा कि क्या यह कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य व्यवस्था को खराब करने का षड्यंत्र है ?

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में भाजपा पर आरोप लगाया है कि उसका (भाजपा का) स्पष्ट एजेंडा है कि महाराष्ट्र सरकार कोविड-19 की रोकथाम में असफल रही है। शिवसेना का दावा है कि विपक्ष लगातार केन्द्र सरकार की मदद से इस दिशा में प्रयास कर रहा है।

मुखपत्र में कहा गया है कि लोगों की जीवन रक्षा के मुद्दे पर कम से कम महाराष्ट्र सरकार और विपक्ष को एकमत होना चाहिए और कोविड-19 के मरीजों के इलाज में आवश्यक दवाओं की कमी से हो रही लोगों की मौत पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।

रेमडेसिविर के निर्यात पर प्रतिबंध होने के बावजूद इंजेक्शन की हजारों शीशियां विदेश भेजे जाने की सूचना मिलने के बाद मुंबई पुलिस ने शनिवार को एक फार्मा कंपनी के निदेशक से पूछताछ की थी।

यह सूचना मिलने पर, कि कंपनी के निदेशक से पूछताछ की जानी है, पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और राज्य भाजपा के एक अन्य नेता प्रवीण दारेकर तुरंत पुलिस थाने पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य में रेमडेसिविर की कमी के कारण फार्मा कंपनियों से संपर्क कर रही है।

फडणवीस ने कहा कि उन लोगों ने महाराष्ट्र के लिए रेमडेसिविर का इंतजाम करने की पूरी कोशिश की।

लेकिन, सोमवार को सामना के संपादकीय में आरोप लगाया गया कि कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए ऑक्सीजन और रेमडेसिविर की आपूर्ति को लेकर राजनीति की जा रही है।

उसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र सरकार को रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं, लेकिन भाजपा के नेता यह इंजेक्शन फार्मा कंपनियों से सीधे-सीधे खरीद रहे हैं।

शिवसेना ने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि विपक्ष के नेता ने राज्य के बजाय किसी फार्मा कंपनी की वकालत की हो।

सामना में सवाल किया गया है, ‘‘क्या यह कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य व्यवस्था खराब करने का षड्यंत्र नहीं है?’’

शिवसेना ने दावा किया कि इंजेक्शन का उपलब्ध स्टॉक सीधे-सीधे भाजपा को मुहैया कराना, फार्मा कंपनियों द्वारा किया गया ‘अपराध’ है।

भाषा अर्पणा मनीषा

मनीषा