Post Office ने अपने सभी छोटे सेविंग स्कीम से जुड़े नियमों में बदलाव किया था. इसमें PPF (पब्लिक प्रोविडेट फंड) से जुड़े नियम में भी संशोधन किया गया है. नियम के तहत अब 1968 और गवर्मेंट सेविंग्स सर्टिफिकेट्स एक्ट, 1959 दोनों गवर्मेंट सेविंग्स प्रमोशन एक्ट 1873 के तहत आते हैं. हम आपको बताते हैं इसमें क्या संशोधन किया गया है.

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एक वित्त वर्ष में PPF में न्यूनतम 500 रुपये से लेकर अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं. पहले PPF खाते में प्रति माह एक किस्त या एकमुश्त राशि जमा किए जा सकते थे. लेकिन अब एक माह में एक से अधिक किस्त जमा की जा सकती है. वहीं, PPF अकाउंट खुलवाने के लिए अब फॉर्म 1 भरना होता है.

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PPF के मैच्योरिटी पर इसे 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए डिपॉजिट चालू रखा जा सकता है या डिपॉजिट के ही पहले से जमा धनराशि पर इंटरेस्ट पाता रह सकता है. अब डिपॉजिट के साथ PPF चालू रखने के लिए या तो मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने के 1 साल के अंदर एक डिपॉजिट कर देना होगा या फिर अब फॉर्म एच के बजाय फॉर्म 4 भरना होगा.

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मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने के बाद बिना आगे डिपॉजिट किए PPF जारी रखना चाहते हैं तो अब खाताधारक हर वित्त वर्ष में एक विदड्रॉल कर सकेंगे.

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PPF लोन के प्रिंसिपल अमाउंट का भुगतान होने के बाद खाताधारक को दो मासिक किस्तों में प्रिंसिपल अमाउंट के 1 फीसदी सालाना की दर से ब्याज का भुगतान करना होता है. यह ब्याज लोन लिए जाने वाले महीने के अगले महीने के पहले दिन से लेकर आखिरी किस्त भरे जाने के महीने के आखिरी दिन तक की अवधि के लिए देना होता है. अगर PPF लोन को चुकाए जाने की तय अवधि के अंदर पूरा लोन चुकता नहीं किया जाता है तो लोन लेने वाले को 6 फीसदी सालाना की दर से ब्याज चुकाना होगा.

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