90 साल की बुजुर्ग के झुर्रियों से भरे हाथों पर दरिंदगी के जख्म,  अब मदद मांगने में भी डर लगेगा

 

सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामला, रिया चक्रवर्ती, कंगना रनौत, शिवसेना इस हफ्ते सब इन खबरों में व्यस्त रहे, लेकिन मैं दिल्ली में हुई एक दर्दनाक घटना की वजह सिहरी हुई हूं .  इन तमाम खबरों के बीच बार-बार उस घटना पर दिल-दिमाग चला जा रहा है. इस हफ्ते की शुरुआत में 90 साल की महिला के साथ 33 साल के लड़के ने हैवानियत की. महिला ने बेटा जैसे दिखने वाले आरोपी की मदद करने वाली बात पर विश्वास किया और लड़के ने उसी विश्वास को तार-तार कर दिया.  

घटना नजफगढ़ के छावला की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक- महिला करीब 5 बजे अपने घर के बाहर दूध वाले का इंतजार कर रही थी. तभी एक अनजान व्यक्ति आया और कहा कि आज दूध वाला नहीं आएगा. वो उन्हें दूसरी जगह ले चलेगा, जहां दूध मिलता है. 90 साल की महिला को लगा वह मेरी मदद कर रहा है. वह उन्हें जबरदस्ती सुनसान जगह ले गया, जहां उसने अपनी दादी की उम्र की महिला के साथ दरिंदगी की. महिला ने बचाव की कोशिश की तो उस लड़के ने वृद्धा को बुरी तरह पिटा. महिला की चीख-पुकार जब किसी ने सुनी तो लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.

इस घटना ने अंदर तक झकझोर कर रख दिया है. पीड़ित बुजुर्ग महिला के बारे में सोच रही हूं कि क्या बीत रही होगी उन पर. एक रिपोर्ट के मुताबिक- दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल पीड़ित बुजुर्ग महिला से मिली थीं. उन्होंने जो बताया उसे पढ़कर जैसे दिल-सा टूट गया. उन्होंने बताया कि "बुजुर्ग महिला के हाथ पूरी तरह झुर्रियों से भरे हैं. उनके चेहरे और शरीर पर पिटाई के निशान है.वह काफी डरी और घबराई हुई हैं."

बुजुर्ग महिला के शरीर पर चोटों के निशान इसलिए थे कि उन्होंने बार-बार उसे अपनी उम्र का वास्ता दिया. बेटा-बेटा कहकर रोका. लड़के ने बुजुर्ग महिला के इसी विरोध पर उनकी बेरहमी से पिटाई की. अब वह बाहरी शरीर के साथ अंदरूनी जख्मों से भी जूझ रही हैं. सोचिए 90 साल तक एक अच्छी जिंदगी जीने के बाद उम्र के इस पड़ाव पर वह इस दर्द से कैसे उबरेंगीं? कैसे वह अपने परिवार में पहले की तरह नॉर्मल हो पाएंगीं. उनकी पीड़ा को लेकर मेरा मन लगातार बैठा-सा जा रहा है.  

बुजुर्गों का हाथ आशीर्वाद के लिए जब सिर पर रखा होता है तो ऐसा लगता है कि शरीर ही नहीं, आत्मा भी तृप्त हो गई. पीड़ित बुजुर्ग महिला के झुर्रियों से भरे हाथ आज जख्मों से भरे पड़े हैं. ये सोचकर मन बेचैन हो रहा है.

देश में 3 महीने की बच्ची से लेकर बुजुर्ग तक इस तरह की घटनाओं का शिकार हो रही हैं. किसे दोष दूं, कानून को, संस्कारों को जो इस तरह के आरोपियों में नहीं होते या फिर उस कुचलने वाली मानसिकता को जो आज भी इस तरह के अपराधों को अंजाम देने वाले लोगों के जहन में भरी है. किसे दोष दूं, किससे कहूं कि ऐसा मत करो... दर्द होता है.... शरीर ही नहीं, आत्मा तक दर्द होता है... किससे कहूं....