कोटा (राजस्थान), 25 मई (भाषा) राजस्थान के बारां जिले में सहरिया आदिवासी आबादी को पोषक आहार उपलब्ध कराने की प्रायोगिक परियोजना के तहत स्थापित ‘पोषण वाटिकाएं’ पानी की कमी और देखभाल के अभाव में सूख रही हैं।

पोषण मिशन ‘पोषण अभियान’ के तहत पिछले साल जुलाई में आंगनवाड़ी केंद्रों में कम से कम 55 पोषण वाटिकाएं तैयार की गई थीं - किशनगंज में 30 और बाकी शाहबाद में।

लेकिन इनमें से करीब 20 ऐसी वाटिकाएं ही वर्तमान में कायम हैं क्योंकि बाकी वाटिकाएं अपने अपने इलाके में पानी की कमी से बुरी तरह प्रभावित हैं। जारी लॉकडाउन ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है क्योंकि आंगनवाड़ी केंद्र बंद हैं और उनसे जुड़े स्टाफ कोविड-19 के खिलाफ अभियान में कार्यरत हैं।

बारां में आईसीडीएस के उपनिदेशक हरिशंकर नुवाल ने बताया कि आदिवासी इलाके में काम कर रहे गैर सरकारी संगठन ‘एक्शन अगेंस्ट हंगर’ (एएएच) से तकनीकी सहायता लेकर प्रत्येक वाटिका में मौसमी पोषक पौधे एवं सब्जियां जैसे पालक, मेथी, गाजर, मूली, शलगम और लौकी लगाई जाती हैं।