कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटनाओं की अदालत की निगरानी में CBI जांच का आदेश दिया है. हाई कोर्ट ने CBI को अगले छह सप्ताह में अपनी जांच पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. हाई कोर्ट का ये निर्णय पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की बेंच ने चुनाव के बाद की कथित हिंसा से संबंधित अन्य सभी अपराधों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का भी आदेश दिया है. पीठ ने कहा कि दोनों जांच की निगरानी अदालत करेगी. 

एसआईटी में आईपीएस अधिकारी महानिदेशक (दूरसंचार) सुमन बाला साहू, कोलकाता पुलिस आयुक्त सौमेन मित्रा और रणवीर कुमार शामिल होंगे. 

2 मई के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पश्चिम बंगाल में हिंसक घटनाएं रिपोर्ट की गईं और गृह मंत्रालय ने तब सत्तारूढ़ टीएमसी सरकार से राज्य में विपक्षी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई हिंसा पर रिपोर्ट मांगी है. 

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हाई कोर्ट के इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा, "क़ानून-व्यवस्था राज्य का अधिकार है. अगर उसमें CBI आ जाएगी तो राज्य का अधिकार घट जाएगा. हम इसके ख़िलाफ हैं. मुझे लगता है कि राज्य सरकार इस पर सोच-विचार करेगी और इसके ख़िलाफ अपील भी करेगी."  

वहीं केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने निर्णय का स्वागत करते हुएकहा , "वहां(पश्चिम बंगाल) सरकार को दायित्व मिला है जनता की सेवा करने का, ना की हिंसा फैलाने का. हिंसा नहीं होनी चाहिए. जहां से स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आए, उस राज्य को हिंसा के लिए जाना जाए तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा."

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