केंद्र द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने एक कविता सुनाई और कहा यह हमें खिलाने वाले हाथों के प्रति सम्मान है.

पिछले हफ्ते पहली बार किसानों के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए 33 वर्षीय अभिनेत्री ने बुधवार शाम को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर विरोध कर रहे किसानों के बारे में अपने विचार साझा किए.

एक मिनट 19 सेकंड लंबी क्लिप में उन संकटग्रस्त किसानों के वीडियो को शामिल किया गया है, जो केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर नवंबर से ही विरोध करने के लिए इकट्ठे हुए हैं.

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सिन्हा के मुताबिक हिंदी कविता वरद भटनागर ने लिखी थी और इस वीडियो को गुरसंजम सिंह पुरी ने शूट और संकल्पना दी थी. उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा, ‘‘नजर मिलाके, खुद से पूछो: क्यों? वरद भटनागर की लिखी हुई यह कविता उन अन्नदाताओं के प्रति सम्मान है जो हमें खिलाते हैं. इसे शूट और इसकी संकल्पना गुरसंजम पूरी ने की है और इसका पाठन मैं कर रही हूं.”

उन्होंने आगे सवाल किया कि विरोध करने के लिए सड़कों पर बाहर निकलने वाले बुजुर्गों और बच्चों को दंगाइयों के रूप में क्यों प्रस्तुत किया जा रहा है.

पूरी कविता-

क्यों? सब पूछते हैं क्यों हम सड़कों पर उतर आए हैं?

खेत खलिहान के मंजर छोड़े, क्यों बंजर शहरों में घुस आए हैं?

ये माटी, बोरी, हसिया, दरांती वाले हाथ, क्यों हमने राजनीति के दलदल में सनवाए हैं?

दही, मक्खन और गुड़ वालों ने क्यों इरादे मशालों से सुलगाए हैं?

अरे बूढ़ी आखों, नन्हें कदमों ने क्यों ये दंगे भड़काए हैं?

दंगे, ये तुम्हें दंगे दिखाई देते हैं, क्यों?

अपने ही हिस्से की रोटी खाना जायज नहीं है, क्यों?

मक्के की रोटी, सरसों का साग, वैसे तो बड़े चटकारे लेते होअब उन्हीं के खातिर ये सब करना ठीक नहीं है, क्यों?

नजरें मिलाकर जरा खुद से पूछो, क्यों?

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