नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) अक्सर यह कहा जाता है कि शेयर बाजार निवेशकों की धारणा पर काम करता है। बाजार को निवेशक धारणा से ही आक्सजीन मिलती है। लेकिन मौजूदा कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौर में जब बाजार नीचे गिर रहा है आक्सीजन नाम वाली कंपनियों के शेयर आकर्षण का केन्द्र बने हुये हैं। हालांकि, इन कंपनियों का जीवनरक्षक गैस के कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है।

बीएसई में सोमवार को बांबे ऑक्सीजन इन्वेस्टमेंट्स लि. का शेयर ऊपरी सर्किट सीमा 24,574.85 रुपये पर पहुंच गया। यह शेयर निगरानी में है। ऐसे में इसमें अधिकतम लाभ की सीमा पांच प्रतिशत है। कुछ यही ‘गैस’ और ऑक्सीजन नाम वाली अन्य कंपनियों के शेयरों में हुआ। इन सभी कंपनियों की किसी संभावित गड़बड़ी के लिए जांच चल रही है।

बांबे ऑक्सीजन के शेयर में पिछले कुछ दिन में जबर्दस्त उछाल आया है। कंपनी के शेयर का मूल्य मार्च अंत के 10,000 रुपये से दोगुना से अधिक हो गया है।

हालांकि, कंपनी की वेबसाइट पर स्पष्ट किया गया है कि उसकी स्थापना तीन अक्टूबर, 1960 को बांबे ऑक्सीजन कॉरपोरेशन लि.के रूप में हुई थी। लेकिन तीन अक्टूबर, 2018 से उसने अपना नाम बदलकर बांबे इन्वेस्टमेंट्स लि. कर लिया था। कंपनी ने कहा है कि उसका मुख्य कारोबार औद्योगिक गैस के विनिर्माण और आपूर्ति का था, जो उसने एक अगस्त, 2019 से बंद कर दिया है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी की वेबसाइट में विरोधाभास है। कंपनी अब ऑक्सीजन का कारोबार नहीं करतर। लेकिन उत्पाद खंड में ऑक्सीजन और अन्य औद्योगिक गैसों का उल्लेख है। हालांकि, मुंबई की कंपनी को बीएसई में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में दर्शाया गया है। 31 दिसंबर, 2020 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी की कुल आय 33.79 करोड़ रुपये और मुनाफा 31.69 करोड़ रुपये था।

कंपनी का बाजार पूंजीकरण अभी 368 करोड़ रुपये का है।

भाषा अजय

अजय महाबीर

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