नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपनी अपील वापस लेने की अनुमति दे दी, जिसने तृणमूल कांग्रेस के तीन नेताओं सहित चार नेताओं को नारद रिश्वत मामले में घर में ही नजरबंद रखने की अनुमति दी थी।

न्यायमूर्ति विनीत शरण और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अवकाशकालीन पीठ ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की पीठ नारद रिश्वत मामले की सुनवाई कर रही है। इसने सीबीआई की तरफ से पेश हुए सोलीसीटर जनरल तुषार मेहता को अपनी अपील वापस लेने और सभी शिकायतों को उच्च न्यायालय में उठाने की अनुमति दे दी।

पीठ ने कहा, ‘‘हमने मामले के गुण-दोष पर कोई विचार व्यक्त नहीं किया है और मामले में हमारी टिप्पणियां हमारे विचारों को प्रदर्शित नहीं करती हैं।’’ इसने कहा कि पश्चिम बंगाल और नेता भी उच्च न्यायालय के समक्ष अपने मुद्दों को उठाने के लिए स्वतंत्र हैं।

उच्च न्यायालय ने 21 मई को पश्चिम बंगाल के दो मंत्रियों, एक विधायक और कोलकाता के पूर्व महापौर को जेल से हटाकर उनके घरों में ही नजरबंद करने के आदेश दिए थे।

उच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 24 मई को मामले में सुनवाई की और मामले में सुनवाई स्थगित करने के सीबीआई के आग्रह से इंकार कर दिया।

नारद स्टिंग टेप मामले में पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री फिरहाद हाकिम, पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी, टीएमसी के विधायक मदन मित्रा और कोलकाता के पूर्व महापौर शोभन चटर्जी को सीबीआई ने पिछले सोमवार को गिरफ्तार किया था। उच्च न्यायालय के 2017 के एक आदेश पर एजेंसी मामले की जांच कर रही है।