चेन्नई, 26 मई (भाषा) तमिलनाडु के मंत्री पी के शेखर बाबू ने यहां रहने वाले उत्तर भारतीयों पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों सहित पिछले कुछ वर्षों के दौरान उन्होंने द्रमुक को वोट नहीं दिया है।

बाबू ने कहा कि हालांकि पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने उनके लिए काम किया है और आगे भी करते रहेंगे क्योंकि वे उन्हें ‘‘हमारे बीच में से एक’’ मानते हैं।

बाबू की टिप्पणी की भाजपा और कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने कड़ी आलोचना की।

हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ सहायता विभाग के मंत्री बाबू ने कहा कि हालांकि उनसे पूछा जाता रहा है कि वह उनके लिए काम क्यों करते हैं क्योंकि उन्होंने द्रमुक को वोट नहीं दिया, उनका जवाब रहता है कि वे भी इसी मिट्टी के पुत्र हैं और यही पार्टी का भी रुख है।

उन्होंने कहा कि द्रमुक का उत्तर भारतीय लोगों के लिए काम इस सिद्धांत पर आधारित है कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि, एक विधायक या मुख्यमंत्री सभी लोगों के लिए समान होता है, भले ही किसी ने चुनाव जीतने वाली पार्टी के पक्ष में मतदान किया हो या नहीं।

उत्तर चेन्नई के कई क्षेत्रों, विशेष रूप से हार्बर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं, जो मूल रूप से राजस्थान से हैं, वहीं कुछ गुजरात के मूल निवासी हैं।

द्रमुक के जिला सचिव (चेन्नई-पूर्व) बाबू हार्बर सीट से निर्वाचित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों, खुद उन्होंने और लोकसभा सदस्य (मध्य चेन्नई) दयानिधि मारन ने उन निवासियों के हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से कार्य किया है जो उत्तर भारत के मूल निवासी हैं।

मंत्री की टिप्पणी की सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के एक वर्ग ने कड़ी आलोचना की।

भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और कोयंबटूर-दक्षिण से विधायक वनती श्रीनिवासन ने ट्वीट किया, ‘‘मंत्री शेखर बाबू द्वारा उत्तर भारतीयों के खिलाफ जो नफरत फैलाई गई है, वह निंदनीय और परेशान करने वाली है।’’

भाषा अमित वैभव

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