"स्कूल मेरा मंदिर है, छात्र मेरे भगवान हैं, उन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षा देना मेरी पूजा है." सोनलबेन फलदू को गुजरात के पूर्व राज्यपाल ओपी कोहली के हाथों से राज्य की "सर्वश्रेष्ठ प्राचार्य" का सम्मान मिला और केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला वरद के हाथों से "उमा नारी रत्न पुरस्कार" भी मिला है. ऐसे ही कई सम्मान सोनलबेन को मिले हैं. Opoyi ने ऐसी प्रतिभाशाली व्यक्तित्व वाली शिक्षिका से बात की और उनकी उपलब्धियों के बारे में जाना.

सवाल : आपके करियर की शुरुआत कहां और कैसे हुई?

सोनलबेन : गुजरात के कालावड (शीतला) के एक खेत में काम करने गुजारा करने वाले मेरे माता-पिता चाहते थे कि हमारे बच्चे पढ़ाई करके कुछ बनें. मैंने उनके सपनों को साकार करने के लिए दौड़ लगाई और बीएड करने के बाद "महर्षि दयानंद रचित ऋग्वेद भाष्य विवेचनात्मक" विषय पर अपनी पीएचडी पूरी करके डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की. फिर 2000 से 2008 तक शिक्षा के क्षेत्र में मोरबी के श्रीमती डीजे पटेल कन्या विद्यालय के उच्चतर माध्यमिक विभाग में सेवा करने के बाद मैं 2008 से आज तक राजकोट में कॉरपोरेशन द्वारा संचालित श्रीमती सरोजनी नायडू गर्ल्स हाईस्कूल में प्रधानाचार्य के रूप में काम कर रही हूं. आज मेरी और मेरे स्कूल का जो स्थान है, उसका श्रेय हमारे स्टाफ और छात्रों को जाता है. उनकी अथक मेहनत और लगन के कारण ही हम आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं. मेरा मानना है कि मैंने और मेरे परिवार ने जिन समस्याओं को सहन किया है, वे आज मेरे छात्रों सहन न करना पड़े.

सवाल : गुजरात में पहला डिजिटल स्कूल बनाने के लिए क्या-क्या करना पड़ा?

सोनलबेन : हमारे शिक्षकों की कड़ी मेहनत और छात्रों के मजबूत मनोबल के कारण 10वीं और 12वीं क्लास में परिणाम धीरे-धीरे बढ़े हैं और कई वर्षों से राजकोट के निजी और सरकारी स्कूलों से सरोजिनी गर्ल्स हाई स्कूल का परिणाम आगे चल रहा है. इसी दौरान 'गुजरात गैस' ने एक स्कूल को डिजिटल स्कूल बनाने की बात की. उन्होंने जब सर्वे किया तो गुजरात में ऐसे स्कूल को चुना जो सबसे अलग और शिक्षा के क्षेत्र में सबसे आगे था. 'गुजरात गैस' के आर्थिक सहयोग से और सरकार के मार्गदर्शन से राजकोट के श्रीमती सरोजनी नायडू गर्ल्स हाईस्कूल को डिजिटल स्कूल बनाने का फैसला किया गया. स्कूल अब आपके सामने है.

सवाल : स्कूल के द्वारा बेटियों के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

सोनलबेन : बेटियों के भविष्य, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, पर्यावरण, जागरूकता, स्वच्छ भारत कार्यक्रम, योग, खेल, मतदान जागरुकता, राजनीतिक जानकारी, उनके और उनके परिवार के भविष्य के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. अध्ययन, आत्मरक्षा आदि के साथ अलग-अलग कार्यक्रमों के तहत अभियान चलाए जाते हैं ताकि भविष्य में जो भी छात्र-छात्राएं यहां से पढ़ाई करके निकलें, वे आत्मनिर्भर बन सकें. उपरोक्त गतिविधियों के माध्यम से स्टूडेंट्स के शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए हर संभव प्रयास किया जाता है ताकि वे समाज में एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें और एक उत्कृष्ट जीवन जी सकें और मजबूत बन सकें.

सवाल : स्कूल की अन्य उपलब्धियां क्या हैं?

सोनलबेन : स्कूल के साथ-साथ छात्रों को स्कूल के ऐसे कई अन्य कार्यों के लिए भी सम्मानित किया गया है. "तारक मेहता का उल्टा चश्मा" द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छ भारत अभियान में पुरस्कार मिला है. राजकोट कॉरपोरेशन द्वारा आयोजित और राज्य सरकार के एक मिशन, स्मार्ट सिटी में सरोजिनी नायडू स्कूल ने शहर में 24 घंटे सफाई अभियान चलाया और इसके लिए सरकार द्वारा स्कूल को सम्मानित किया गया. राजकोट शहर के पुलिस आयुक्त मोहन झा ने स्कूल को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया.

सवाल-स्कूल में छात्राओं के लिए क्या सुविधाएं दी गई हैं?

सोनलबेन : श्रीमती सरोजी के नायडू स्कूल में कई बेटियां हैं, जिनके घर में रोशनी भी नहीं है, बहुत गरीब परिवार से संबंध रखती हैं. सभी क्षेत्रों में ऐसी बेटियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए स्कूल ने खेल मैदान, कंप्यूटर लैब, सभी कक्षाओं में स्मार्ट डिजिटल बोर्ड, विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकालय आदि सुविधाएं प्रदान की हैं.

सोनालबेन ने कहा कि हमारी छात्राओं को अमेरिका से ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है, साथ ही पहली बार इस स्कूल में छात्राओं के लिए सैनेटरी नैपकिन मशीन भी रखी गई, ताकि छात्राओं को उन दिनों में कोई समस्या न आए.