नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश में टीके की भारी कमी का हवाला देते हुए बुधवार को कहा कि अगर केंद्र और राज्य मिलकर इस घातक वायरस का मुकाबला करने में विफल रहते हैं तो भारत कोविड के खिलाफ यह लड़ाई हार जाएगा।

केजरीवाल ने केंद्र और राज्यों से टीके खरीदने के लिए ‘टीम इंडिया’ के रूप में हाथ मिलाने की अपील की। वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘‘आश्वासन’’ दिया कि सभी मुख्यमंत्री उन्हें दी गई कोई भी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं।

केजरीवाल ने एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में कहा, ‘‘देश टीके क्यों नहीं खरीद रहा है? भारत कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है और ऐसी स्थिति में राज्य सरकारों को खुद ही देखने के लिए नहीं कहा जा सकता है। अगर कल, पाकिस्तान भारत के खिलाफ युद्ध की घोषणा करता है, तो क्या उत्तर प्रदेश को अपने टैंक खरीदने चाहिए और दिल्ली को अपने हथियार?’’

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कई महीनों में कई बड़ी गलतियां की गईं। ऐसे समय जब दूसरे देश अपने नागरिकों का टीकाकरण कर रहे थे, हम टीकों का निर्यात कर रहे थे। देश में टीकाकरण में पहले ही छह महीने की देरी हो गई है।’’

केजरीवाल ने दावा किया कि भारत ने कोविड के खिलाफ पहला टीका विकसित किया था। उन्होंने इसको लेकर निराशा व्यक्त की कि टीकाकरण की तात्कालिकता अभी भी गायब है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत यह लड़ाई नहीं हार सकता। यदि केंद्र सरकार हारेगी तो भाजपा नहीं हारेगी, भारत हारेगा। यदि दिल्ली सरकार हारेगी तो आम आदमी पार्टी नहीं हारेगी, भारत हारेगा। यदि महाराष्ट्र सरकार हारती है तो शिवसेना नहीं हारेगी, भारत हारेगा।’’

उन्होंने कहा कि यह समय सामंजस्यपूर्ण ढंग से काम करने का है, राज्य सरकारों के साथ प्रतिस्पर्धा में शामिल होने का नहीं है। उन्होंने कहा कि यह वह समय है जब 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को केंद्र सरकार के साथ मिलकर ‘टीम इंडिया’ के रूप में काम करना चाहिए।

केजरीवाल ने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री को आश्वस्त करना चाहता हूं कि सभी मुख्यमंत्री आपके साथ हैं और कोई भी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन केंद्र को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। राज्य केंद्र की जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर सकते।’’

केजरीवाल ने अन्य मुख्यमंत्रियों के साथ अपनी बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों को टीके खरीदने की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन एक भी राज्य खुराक की खरीद में सफल नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र अपनी जिम्मेदारियों का त्याग नहीं कर सकता और इसे राज्य सरकारों पर नहीं छोड़ सकता है। उसकी जिम्मेदारी टीकों की खरीद करने और राज्यों को आपूर्ति करने की है।’’

केजरीवाल ने दावा किया कि देश में टीके वितरण और बड़े पैमाने पर टीकाकरण की योजना का अभाव है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई अन्य देशों ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया है और कोविड-19 को नियंत्रण में लाया है।

दिल्ली में टीके की कमी का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि 18-44 वर्ष आयु वर्ग के लिए खुराक समाप्त हो गई है और 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए कोवैक्सीन का भंडार भी समाप्त हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा सिर्फ दिल्ली का नहीं बल्कि पूरे देश का मामला है। किसी महामारी की स्थिति में, हमें आदर्श रूप से हर दिन नए केंद्र खोलने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। हम देश में टीकों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि अगर भारत में लोगों को सही समय पर टीका लगा दिया गया होता, तो संभवत: दूसरी लहर का असर कम हो सकता था और कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

उन्होंने कहा, ‘‘दूसरी लहर देश के लिए बेहद घातक साबित हुई है। बमुश्किल कोई परिवार ही कोविड-19 से अछूता रहा है।’’

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि तमाम कोशिशों के बावजूद, राज्य अब तक किसी भी कंपनी से टीके की एक अतिरिक्त खुराक पाने में नाकाम रहे हैं, जबकि उनमें से कई ने वैश्विक निविदाएं जारी कीं, लेकिन असफल रहे।

केजरीवाल ने कहा कि विदेशी टीका निर्माताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केंद्र के साथ करार करेंगी और अलग-अलग राज्यों की मांगों पर विचार नहीं करेंगे।