तेलंगाना-आंध्र प्रदेश सीमा पर जमीन के अंदर बने श्रीसैलम पनबिजली संयंत्र में गुरुवार रात आग लग गई तथा इसमें नौ लोगों के फंसे होने की आशंका थी. प्लांट में फंसे सभी नौ मजदूरों के शव रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बरामद कर लिए गए हैं.

अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया था कि आग पर काबू पा लिया गया है लेकिन घटनास्थल से घना धुआं निकल रहा है और इस वजह से बचावकर्मी अंदर नहीं जा पा रहे थे.

नगरकुर्नूल के जिलाधिकारी एल शरमन ने बताया कि तीन अग्निशमन वाहन संयंत्र के परिसर से निकल रहे धुएं को हटाने के काम में लगे हैं.

मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ बचाव कार्य का जायजा ले रहे हैं. कन्द्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल से बचाव कार्य में सहयोग देने को कहा है.

शरमन ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ से कहा, ‘‘बहुत घना धुआं है और इसकी वजह से हम संयंत्र परिसर में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं. उम्मीद है कि हम सुबह 11 बजे तक संयंत्र में जा पाएंगे.’’

संयंत्र में फंसे नौ लोगों में एक उप अभियंता और एक सहायक अभियंता शामिल हैं. उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मुख्य ध्येय उन्हें बचाना है.... उनके पास मोबाइल फोन नहीं हैं इसलिए हम उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और वहां मोबाइल नेटवर्क भी नहीं है.’’ उन्होंने कहा कि प्रारंभिक सूचना के अनुसार आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी होगी.

तेलंगाना स्टेट पॉवर जेनरेशन कॉरपोरेशन (जेनको) के मुख्य अभियंता बी सुरेश के मुताबिक जब हादसा हुआ उस वक्त संयंत्र में कम से कम 25 लोग थे, जिनमें से 15-16 बाहर आने में कामयाब रहे.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि छह लोगों को सांस लेने में दिक्कत के बाद स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

कृष्णा नदी पर बना श्रीसैलम लेफ्ट बैंक पॉवर स्टेशन हैदराबाद से करीब दो सौ किलोमीटर दूर है और तेलंगाना स्टेट पॉवर जेनरेशन कॉरपोरेशन (जेनको) इसे संचालित करता है.

संयंत्र में छह इकाइयां हैं जिनकी कुल क्षमता 900 मेगावॉट बिजली उत्पादन की है और पिछले कुछ दिन से बारिश होने से यहां बिजली उत्पादन जोरों से हो रहा था.

अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है लेकिन पॉवर हाउस के भूमिगत क्षेत्र में धुआं भरा है जिससे बचाव कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं.

उन्होंने बताया कि नीचे फंसे नौ लोगों में से दो लोग उस कंपनी से हैं जो बैटरी के रखरखाव का काम संभालती है.

सुरेश ने बताया, ‘‘ संयंत्र में तीन आपात निकास हैं. ऐसी संभावना है कि वे वहां से निकल सकते हैं लेकिन जब तक धुआं समाप्त न हो जाए और बचाव दल अंदर नहीं चला जाए हम कुछ नहीं कह सकते.’’

अधिकारी ने कहा, 'हम घने धुएं के कारण वहां तक पहुंच नहीं पाए हैं. फिलहाल हम ट्रांसफार्मर के क्षेत्र में यहां-वहां लगी आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं.'

तेलंगाना के ऊर्जा मंत्री जगदीश रेड्डी ने कहा कि पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवा विभाग के कर्मी बचाव कार्यों में शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि सिंगारेनी कोलियरीज के अधिकारियों से भी मदद के लिए संपर्क किया गया है क्योंकि उनके पास भूमिगत बचाव अभियानों में विशेषज्ञता है.

मुख्यमंत्री राव ने हादसे पर दुख जताया है. मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया, 'मुख्यमंत्री दुर्घटना के बारे में नियमित रूप से जानकारी ले रहे हैं और वह चाहते हैं कि संयंत्र में फंसे लोग सुरक्षित बाहर आ आएं.'

राव ने मंत्री जगदीश रेड्डी और ट्रांसको, जेनको के सीएमडी डी प्रभाकर राव से बात की, जो घटनास्थल पर मौजूद हैं और उन्होंने वहां हो रहे राहत कार्यों की समीक्षा की.

किशन रेड्डी ने कहा कि उन्होंने एनडीआरएफ कर्मियों से बात की और उन्हें तुरंत बचाव कार्यों में शामिल होने का निर्देश दिया.

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘तेलंगाना के श्रीसैलम में जलविद्युत उत्पादन इकाई में देर रात आग लगने की घटना से दुखी हूं. एनडीआरएफ के कर्मियों से बात की और उन्हें तत्काल बचाव कार्य करने का निर्देश दिया. घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है.’’

तेलंगाना भाजपा ने एक बयान में सरकार से घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग करने की मांग की, साथ ही संयंत्र में फंसे लोगों के लिए राहत एवं बचाव कार्य तेजी से करने की मांग की.

इस बीच सिंगारेनी कोयलरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) के तीन अधिकारियों समेत 20 लोगों के दो दल श्रीसैलम के लिए रवाना हो गए हैं.

एसीसीएल के महाप्रबंधक (बचाव) एस वेंकटेश्वरलू ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘टीमें विषम परिस्थितियों में फंसे लोगों को बचाने में विशेषज्ञ हैं. हमारे पास ऐसे उपकरण हैं जो हमारे कर्मियों को ऐसे स्थानों पर भी ले जा सकते हैं जहां जहरीली गैसें है और ऑक्सीजन नहीं है साथ ही वे घने धुएं वाले स्थानों पर भी जा सकते हैं.’’