एक साल पूर्व 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल 2019 पेश किया था. बिल के कानून बनने पर जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 के खंड दो और तीन हट गए. कश्मीर को मिलने वाला स्पेशल स्टेटस छीन लिया गया. इसके साथ ही आर्टिकल 35A भी निष्प्रभावी हो गया. लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग करके उसे केंद्र शासित प्रदेश (लेफ्टिनेंट गवर्नर होंगे, विधानसभा नहीं) बना दिया गया. वहीं जम्मू-कश्मीर को भी केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली की तरह) बना दिया गया.  

बिल को लेकर लद्दाख से 35 वर्षीय बीजेपी सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने लोकसभा में एक तेज तर्रार भाषण दिया. ये भाषण अपने अंदाज के कारण यादगार बन गया. पीएम नरेंद्र मोदी और ग्रह मंत्री अमित शाह ने नामग्याल की इस भाषण के लिए ट्विटर पर पीठ थपथपाई. जबतक नामग्याल बोले तबतक सदन में मेज पीटने की गड़गड़ाहट गूंजती रही. वहीं विपक्षी सांसद भी मंद-मंद मुस्कुराते नजर आए.

पीएम मोदी और अमित शाह ने ट्विटर पर नामग्याल को सराहा था-

नामग्याल ने लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के फैसले का स्वागत किया और कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी पर सात दशक तक लद्दाख को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. 

नामग्याल के उस भाषण की कुछ मुख्य बातें-

-लद्दाख की पारंपरिक वेशभूषा में सदन में आये नामग्याल ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू जी के लीडरशिप में जो गलतियां कांग्रेस ने की ये बिल उनका सुधार है. हम इसका स्वागत करते हैं.

- बहुत लोगों ने कारगिल, लेह और लद्दाख का जिक्र किया, लेकिन क्या ये लोग लद्दाख को जानते हैं. बीते सात दशक तक इनलोगों ने लद्दाख को नजरअंदाज किया.

-लद्दाख ने पिछले 71 साल केंद्र शाषित प्रदेश बनने के लिए संघर्ष किया, हम भारत देश का अटूट अंग बनना चाहते थे.

- आर्टिकल 370 और कांग्रेस के कारण लद्दाख का विकास, राजनैतिक आकांक्षा, पहचान और भाषा लुप्त हुई है.

- अनुच्छेद 370 हटने से कश्मीर में हम बस दो परिवार की रोजी रोटी खोएंगे. कश्मीर का भविष्य उज्जवल होने वाला है.

-कारगिल के लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश (UT) के लिए वोट दिया है. 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव में UT हमारे मेनिफेस्टो में था और मैं रिकॉर्ड वोटों से जीतकर आया.

-लद्दाख को मिलने वाला फंड कश्मीर में खा लिया जाता है. श्रीनगर और जम्मू के सिविल सेक्रेटरिएट में लद्दाख के कितने लोग काम करते हैं? ये कहां की बराबरी है.

- कांग्रेस ने 2011 में कश्मीर और जम्मू को एक-एक केंद्रीय विश्वविद्यायल दिए. तब मैं वहां छात्र राजनीति में था. हमने लद्दाख के लिए यूनिवर्सिटी की मांग की लेकिन कांग्रेस ने नहीं दिया. हाल में नरेंद्र मोदी जी ने यूनिवर्सिटी दी.

-अनुच्छेद 370 का गलत इस्तेमाल करके कश्मीरी पंडितों को रातों रात कश्मीर से भगा दिया गया. साथ ही जम्मू कश्मीर से बुद्धिस्ट लोगों को खत्म करने की कोशिश की. ये कहां की धर्मनिरपेक्षता है. 

-लद्दाख ने 2011 में कश्मीर के झंडे को नकारा और तिरंगे को अपनाया. क्योंकि लद्दाख भारत देश का अटूट अंग बनना चाहता है.

जामयांग सेरिंग नामग्याल के भाषण का वह वीडियो-