केंद्र सरकार श्रम कानून के नियमों में बदलाव करने की तैयारी में है. चार श्रम कोड- मजदूरी, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य पर नए नियम 1अक्टूबर से लागू होने की संभावना है क्योंकि केंद्र अब इन कानूनों के कार्यान्वयन करने की सोच रहा है. वेतन संहिता लागू होने के बाद वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए कई बड़े बदलाव होंगे. हालांकि चर्चा यह भी है कि कर्मचारियों की बेसिक मिनिमम सैलरी बढ़ाई जा सकती है और उनके काम करने का समय भी बढ़ाया जा सकता है.

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पीएफ, ग्रेच्युटी बढ़ेगी

नए कोड के अनुसार, भत्तों की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि वेतन का आधा मूल वेतन होगा और भविष्य निधि में योगदान की गणना मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में की जाती है, जिसमें मूल वेतन और महंगाई भत्ता (डीए) शामिल होता है. नए कोड के तहत भविष्य निधि योगदान को सकल वेतन के 50 प्रतिशत के अनुपात में होना आवश्यक है. इसके परिणामस्वरूप वेतन का पुनर्गठन होगा. क्योंकि कोड के तहत नई आवश्यकताओं से नियोक्ताओं पर भविष्य निधि देनदारियां बढ़ जाएंगी. कंपनी के भविष्य निधि और आयकर खर्च को कम करने के लिए अब तक नियोक्ता मूल वेतन को कम करने के लिए विभिन्न भत्तों में मजदूरी को नष्ट कर रहे हैं.

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इसका मतलब यह भी है कि कर्मचारी के ग्रेच्युटी और पीएफ योगदान में परिणामी वृद्धि होगी. इसलिए, जहां कर्मचारियों का टेक होम सैलरी कम किया जा सकता है, वहीं ग्रेच्युटी और पीएफ घटक बढ़ सकते हैं. नया वेतन कोड असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों पर भी लागू होगा. सैलरी और बोनस से जुड़े नियम बदलेंगे और हर इंडस्ट्री और सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी बराबर होगी.

12 घंटे करना होगा काम

नए मसौदा कानून में, अधिकतम काम के घंटे बढ़ाकर 12 करने का प्रस्ताव किया गया है. ओएससीएच कोड के मसौदा नियमों में 15 से 30 मिनट के बीच अतिरिक्त काम के लिए 30 मिनट के लिए ओवरटाइम के रूप में गिना जाने का प्रावधान है. वर्तमान नियम के तहत, 30 मिनट से कम समय को ओवरटाइम के योग्य नहीं माना जायेगा. मसौदा नियमों ने किसी भी कर्मचारी को लगातार 5 घंटे से अधिक काम करने पर रोक लगा दी है. मसौदा नियमों में कर्मचारियों को हर पांच घंटे के बाद आधे घंटे का आराम देने के निर्देश भी शामिल हैं.

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वर्ष की छुट्टियों में वृद्धि

कर्मचारियों की अर्जित छुट्टी 240 से बढ़कर 300 हो सकती है. श्रम संहिता में बदलाव को लेकर श्रम मंत्रालय, श्रम संघ और उद्योग के प्रतिनिधियों के बीच कई प्रावधानों पर चर्चा हुई. कर्मचारियों ने कर्मचारियों के अर्जित अवकाश को 240 से बढ़ाकर 300 करने की मांग की थी.

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