नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑनलाइन सर्च इंजन गूगल को मादक पदार्थ से संबंधित आरोपों पर भारतीय मूल के एक अमेरिकी नागरिक को बरी करने वाले फैसले के लिंक हटाने का निर्देश दिया है। अमेरिकी नागरिक ने एक याचिका में दावा किया कि फैसला उपलब्ध होने के कारण उसे अमेरिका में अच्छी नौकरी मिलने में मुश्किल आ रही है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने गूगल के अलावा वेब पोर्टल ‘इंडियन कानून’ को भी 20 अगस्त को मामले पर अगली सुनवाई होने तक फैसले के लिंक ब्लॉक करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने इस फैसले को स्थायी रूप से हटाने के याचिकाकर्ता के अनुरोध पर केंद्र, गूगल तथा इंडियन कानून से भी जवाब मांगते हुए उन्हें नोटिस जारी किये हैं।

न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह ने कहा, ‘‘ऑनलाइन मंचों से अदालत का आदेश हटाने का सवाल एक ऐसा मुद्दा है जिसमें याचिकाकर्ता की निजता के अधिकार और जनता के सूचना के अधिकार दोनों पर विचार करने की जरूरत है और साथ ही न्यायिक रिकॉर्ड में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी गौर करने की आवश्यकता है।’’

अदालत ने 12 अप्रैल के अपने आदेश में कहा कि हालांकि याचिकाकर्ता को मामले में बरी कर दिया गया है लेकिन उसे, उसके सामाजिक जीवन तथा करियर के आयामों को ‘‘अपूरणीय पूर्वाग्रहों’’ का सामना करना पड़ सकता है और अत: उसे ‘‘कुछ अंतरिम संरक्षण दिया जाना चाहिए।’’

याचिकाकर्ता के अनुसार, 2009 में जब वह भारत आया तो उसके खिलाफ नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टांसेज (एनडीपीएस) कानून, 1985 के तहत एक मामला दर्ज किया गया था।

निचली अदालत ने अप्रैल 2011 में उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

भाषा गोला मनीषा अनूप

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