वैटिकन सिटी, 26 मई (एपी) पोप फ्रांसिस ने आशवित्ज स्थित हिटलर की हैवानियत के सबसे बड़े यातना शिविर की जीवित बचीं लिडिया माक्सीमोविक्ज के हाथ पर बने टैटू को बुधवार को दर्शकों की मौजूदगी में चूमा।

पोलैंड की नागरिक माक्सीमोविक्ज उस समय मात्र तीन साल की थीं जब उन्हें उनके पैतृक स्थल बेलारूस से आशवित्ज ले जाया गया था।

उन्होंने नाजियों द्वारा अपने हाथ पर गोदे गए नंबर को पोप को दिखाया तो वह झुके और उसे चूम लिया।

माक्सीमोविक्ज ने वैटिकन न्यूज को बताया कि पोप के साथ उनकी बातचीत नहीं हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने एक-दूसरे को नजरों से समझा।’’

वह यातना शिविर के बाल क्षेत्र में तीन साल तक रही थीं।