कृष्ण जन्माष्टमी, भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव है. श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के (पवित्र हिंदू त्रिमूर्ति के तीन में से एक) अवतार और उनके सबसे महत्वपूर्ण और श्रद्धेय अवतारों में से एक हैं. इस बार जन्माष्टमी 30 अगस्त सोमवार को मनाया जा रहा है. भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे, जिनका जन्म द्वापर युग में हुआ था. भारत और दुनिया भर में रहने वाले हिंदू समुदाय के लिए, जन्माष्टमी एक महत्वपूर्ण उत्सव है और इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है. श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर ग्वालियर स्थित फूलबाग के गोपाल मंदिर में सोमवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राधा-कृष्ण को करोड़ों की कीमत वाले बेशकीमती जेवरात पहनाए जाएंगे.

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ग्वालियर का गोपाल मंदिर

गोपाल मंदिर में होगी भव्य सजावट

सिंधिया काल में बने गोपाल मंदिर में इस दिन भगवान कृष्ण और राधारानी को कीमती गहनों से सजाया जाता है. सोमवार की सुबह नगर निगम के प्रशासक, कलेक्टर व अन्य अधिकारी भारी सुरक्षा के बीच इन गहनों को बैंक से निकालकर भगवान को सजाएंगे. नगर निगम द्वारा बैंक लॉकर में रखे करोड़ों रुपये के आभूषण राधाकृष्ण के श्रृंगार में उपयोग किए जाएंगे. इन गहनों की कीमत का अनुमान नगर निगम ने वर्ष 2007 में लगाया था, हालांकि ये सभी आभूषण बेशकीमती हैं.

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सजेंगे ये आभूषण : भगवान के गहनों में सफेद मोतियों वाला पंचगढ़ी हार करीब आठ लाख, सात लाख के हार जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने हैं. 2007 में इनकी अनुमानित कीमत करीब 12 से 14 लाख रुपए है.इसके अलावा कृष्णा सोने की गेंद और एक सोने का मुकुट पहनेंगे, जिसकी कीमत भी करीब 60 लाख रुपये है. गोपाल मंदिर के राधाजी का ऐतिहासिक मुकुट पुखराज के पंख और केंद्र में माणिक और पन्ना के साथ. तीन किलो वजनी इस मुकुट की कीमत करीब तीन करोड़ और इसमें लगे 16 ग्राम पन्ना की कीमत करीब 18 लाख आंकी गई है.

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आजादी के पहले से चल रही है परंपरा

गोपाल मंदिर में स्थापित भगवान राधाकृष्ण की मूर्ति को इन गहनों से अलंकृत करने की परंपरा स्वतंत्रता पूर्व काल की है. उस समय सिंधिया राजपरिवार के लोग और रियासत के मंत्री, दरबारी और आम लोग जन्माष्टमी पर मिलने आते थे. उस समय भगवान राधाकृष्ण को इन गहनों से सजाया गया था. आजादी के बाद मध्य भारत की सरकार बनने के बाद गोपाल मंदिर, उससे जुड़ी संपत्ति, जिला प्रशासन और निगम प्रशासन के अधीन हो गई है.

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