नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) विलुप्ति के कगार पर पहुंची ‘सोन चिरैया’ (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को बचाने के प्रयास के तहत उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को गुजरात और राजस्थान सरकारों को निर्देश दिया कि वे जहां भी संभव हो, ऊपर से गुजरते ‘हाई वोल्टेज’ विद्युत तारों को एक साल के भीतर जमीन के नीचे बिछाएं।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यिन की पीठ ने ‘हाई वोल्टेज’ विद्युत तारों को भूमिगत करने की संभावना का आकलन करने के लिए तीन सदस्यीय एक समिति गठित की जिसमें वैज्ञानिक डॉ. राहुल रावत, डॉ. सुतीर्थ दत्ता और डॉ. देवेश जी शामिल हैं।

न्यायालय ने कहा कि भारत सरकार वैज्ञानिकों की इस समिति को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी।

इसने कहा कि जहां ऊपर से गुजरते ‘हाई वोल्टेज’ तारों को भूमिगत करने की संभावना के बारे में कोई संदेह नहीं है, वहां यह कार्य अभी से शुरू हो जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि जहां प्रतिवादियों को इस तरह की संभावना को लेकर कोई समस्या आए, वे सभी सामग्री और विवरण के साथ मामला समिति को भेजेंगे और फिर समिति इस बारे में निष्कर्ष पर पहुंचेगी कि जमीन के नीचे विद्युत तार बिछाना संभव है या नहीं।

इसने कहा कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रतिवादियों को आगे कार्रवाई करनी होगी और इसे एक साल के भीतर पूरा करना होगा।

न्यायालय ने कहा कि जहां भी ऊपर से गुजरते विद्युत तारों को जमीन के नीचे बिछाने की संभावना हो, वहां काम एक साल के भीतर पूरा हो जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि तारों से टकराकर और इनके करंट की चपेट में आकर संबंधित पक्षियों को मरने से बचाने के साथ ही इनके अंडों की सुरक्षा के लिए भी एक संरक्षण नीति की आवश्यकता है।

न्यायालय का आदेश सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम के रंजीत सिंह और अन्य की याचिका पर आया जिसमें सोन चिरैया और खरमोर पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने का आग्रह किया गया था।

भाषा

नेत्रपाल अनूप

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