टोक्यो पैरालंपिक में भारत के जैवलिन थ्रोअर्स का प्रदर्शन खूब धमाकेदार रहा है. सुमित अंतिल ने भारत को इस प्रतियोगिता में तीसरा मेडल दिलाया है और उन्होंने सोमवार यानी 30 अगस्त को पुरुषों (F64 वर्ग) के फाइनल मुकाबले में गोल्ड जीता है. सुमित की इस जीत के बाद भारत के नाम 7 मेडल हुए हैं. सुमित ने 68.55 मीटर दूर भाला फेंककर गोल्ड मेडल जीता है और इनका थ्रो वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बन गया है. टोक्यो पैरालंपिक में भारत का यह दूसरा गोल्ड मेडल है.

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सुमित अंतलिन से पहले अवनि लखेरा ने शूटिेंग में गोल्ड जीता है. अवनि ने 30 अगस्त को महिलाओं की आर-2 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 में पहला स्थान प्राप्त किया है. सुमित ने इसमें अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दया है क्योंकि पहले प्रयास में 66.95 मीटर का थ्रो किया और ये वर्ल्ड रिकॉर्ड बना. बाद में दूसरे प्रयास में उन्होंने 68.08 मीटर भाला फेंका और नया रिकॉर्ड बनाया. सुमित ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया और 5वें प्रयास में 68.55 मीटर का थ्रो किया. इससे पहले 30 अगस्त को देवेंद झाझरिया और सुंदर सिंह गुर्जर ने भी जैवलिन थ्रो में ही मेडल जीता था. देवेंद्र ने रजत और सुंदर सिंह ने कांस्य पदक जीता है.

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गौरतलब है कि भारत के डिस्कस थ्रो एथलीट विनोद कुमार 30 अगस्त को टूर्नामेंट के पैनल विकार के क्वालिफिकेशन निरीक्षण में अयोग्य पाए गए. पैरालंपिक की पुरुषों की F52 स्पर्धा का कांस्य पदक गवाया है. इसी के साथ भारत के हाथों से एक मेडल निकल गया लेकिन इससे पहले 29 अगस्त को विनोद कुमार ने कांस्य पदक में जीत हासिल की थी. उनके विकार के क्वालिफिकेशन पर विरोध हुआ और इसके बाद उनका मेडल रोक दिया गया. BSF के 41 साल के जवान विनोद कुमार ने 19.91 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में हिस्सा भी लिया था.

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