नागपुर, 26 मई (भाषा) महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के एक गांव की एक सरपंच ने आदिवासी समुदाय की महिलाओं के लिए एक आधुनिक विश्राम गृह या 'माहवारी गृह' स्थापित करने में मदद की है।

गढ़चिरौली में आदिवासी समुदाय ‘कुरमा’ नामक एक प्रथा का पालन करते हैं जिसके तहत महिलाएं मासिक धर्म के दौरान अपने घरों से दूर रहती हैं और इस दौरान अलग गृहों में आराम करती हैं।

जब धनोरा तालुका के फासली टोला गांव की महिलाओं ने बुनियादी सुविधाओं वाले आधुनिक स्वच्छ ‘‘कुरमा’’ घरों की मांग शुरू की तो दुधमाला ग्राम पंचायत सरपंच सुनंदा तुलावी ने एक गैर सरकारी संगठन के साथ मिलकर आदिवासी लड़कियों और महिलाओं के लिए ‘‘माहवारी गृह’’ स्थापित करने के लिए कदम बढ़ाया।

तुलावी ने पीटीआई-भाषा से कहा कि आदिवासी गांवों में एक प्रथा है, जिसके तहत लड़कियां और महिलाएं मासिक धर्म के दौरान खुद को अलग करती हैं और 'कुरमा' गृहों में रहती हैं।

हालांकि, ये अस्थायी घर जीर्ण-शीर्ण स्थिति में थे और इनमें पानी, बिजली जैसी अन्य जरूरतों के अलावा मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। इस साल की शुरुआत में इस पद के लिए चुनी गईं तुलावी ने गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) खेरवाड़ी सोशल वेलफेयर एसोसिएशन, मुंबई से संपर्क करने का फैसला किया, ताकि फासली टोला गांव में एक आधुनिक माहवारी गृह का निर्माण किया जा सके।

उन्होंने कहा कि गांव की महिलाओं के साथ बैठक की गई, जिन्होंने इसके निर्माण में भी मदद की और इस व्यवस्था को 'श्रमदान' करार दिया गया।

उन्होंने कहा कि इस गृह के निर्माण के लिए प्लास्टिक की बोतलों और रेत का इस्तेमाल किया गया जिसमें 13 से 14 महिलाएं रह सकती हैं। तुलावी ने कहा कि इसमें एक बड़ा कमरा, एक शौचालय, एक अलमारी, बिस्तर, गद्दे, पंखे और सौर ऊर्जा चालित बिजली की आपूर्ति है।