नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) विश्व व्यापार संगठन की ट्रिप्स परिषद भारत, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया समेत 62 सह-प्रायजकों के संशोधित प्रस्ताव पर चर्चा करेगी। प्रस्ताव में कोविड-19 के उपचार और रोकथाम से संबंधित चिकित्सा उत्पादों के विनिर्माण को लेकर पेटेंट छूट देने की मांग की गयी है।

भारत और दक्षिण अफ्रीका ने अक्टूबर 2020 में कोविड-19 संक्रमण के इलाज और उसकी रोकथाम के संदर्भ में प्रौद्योगिकी के उपयोग को लेकर डब्ल्यूटीओ के सभी सदस्य देशों को ट्रिप्स (बौद्धिक संपदा के व्यापार संबंधी पहलुओं पर समझौते) समझौते के कुछ प्रावधानों से छूट दिए जाने का पहला प्रस्ताव रखा था।

ट्रिप्स समझौता जनवरी 1995 में लागू हुआ। यह कॉपीराइट, औद्योगिक डिजाइन, अघोषित सूचना या व्यापार संबंधी गोपनीय जानकारी की सुरक्षा जैसे बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर किया गया बहुपक्षीय समझौता है।

संशोधित प्रस्ताव के अनुसार छूट मामले में निर्णय की तारीख से तीन साल के लिये प्रभाव में रहेगी।

प्रस्ताव पेश करने वालों का कहना है कि विनिर्माण के लिहाज से अवधि व्यवहारिक होनी चाहिए।

अधिकारी ने कहा, ‘‘संशोधित प्रस्ताव पर चर्चा ट्रिप्स परिषद में होगी।’’

संशोधित मसौदे में कोविड-19 की रोकथाम और उपचार के लिये स्वास्थ्य उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के लिए छूट का प्रस्ताव किया गया है। इसमें कई चीजें शामिल हैं। उत्पादों तथा प्रौद्योगिकियों, उनकी सामग्री या तत्वों के संबंध में बौद्धिक संपदा से जुड़े मुद्दे के साथ विनिर्माण के तौर-तरीके का मामला भी उत्पन्न हो सकते हैं।

प्रस्ताव लाने वाले देशों का कहना है कि प्रस्तावित छूट कोविड-19 की रोकथाम और उपचार तक सीमित है।

देशों ने शुक्रवार को डब्ल्यूटीओ के समक्ष अपनी बातें रखी।

संशोधित प्रस्ताव के बारे में जवाहरलाल नेहरू विश्विविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा कि तीन साल की अवधि महत्वपूर्ण है क्योंकि इच्छुक कंपनियां निवेश करने का निर्णय लेने से पहले निश्चितता चाहेंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘इस पर अंतिम निर्णय से विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों पर कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए उत्पादों और टीकों के निर्माण के तरीकों तथा साधनों को साझा करने का नैतिक दबाव पड़ेगा।’’

भाषा

रमण मनोहर

मनोहर