उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनावों का बिगुल बज गया है. राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है. पार्टियों में सीटों को लेकर माथापच्ची होने लगी है. पिछले विधानसभा के चुनाव में कुल 403 में से 325 सीटों पर जीत के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विरोधियों को पस्त करके भारी बहुमत हासिल की थी. उत्तर प्रदेश भारत की राजनीति का केंद्र है. जिस वजह से यूपी का विधानसभा चुनाव बाकी राज्यों के चुनाव से कुछ अधिक महत्वपूर्ण होता है.

अब बात करते हैं. हाथरस जिले में आने वाली तीन विधानसभा सीटों में से एक सिकंदराराऊ विधानसभा सीट की.

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पिछले चुनावी समीकरण

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी ने कमल खिलाया था. इस सीट से बीजेपी के प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह राणा को लगभग 15 हजार वोटों से जीत प्राप्त हुई थी. वीरेंद्र सिंह राणा को कुल 76,129 वोट मिले थे. वहीं बसपा के बनी सिंह बघेल 61,357 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे, साथ ही सपा के प्रत्याशी यशपाल सिंह चौहान 59,740 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे.

वहीं साल 2012 के विधानसभा चुनाव में सिकंदराराऊ विधानसभा सीट पर बसपा के रामवीर उपाध्याय को जीत प्राप्त हुई थी, उन्हें कुल 94,471 वोट मिले थे.

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सिकंदराराऊ विधानसभा सीट के मतदाता

साल 2017 के आंकड़ों के अनुसार इस विधानसभा सीट पर लगभग 5 लाख 61 हजार मतदाता है. जिनमें से 2 लाख 92 हजार मतदाता पुरुष वहीं 2 लाख 69 हजार मतदाता महिलाएं.

फूलों की खेती है सिकंदराराऊ की पहचान

सिकंदराराऊ शहर पर कृषि आबादी का प्रभुत्व है. यह एक ऐतिहासिक शहर है, जिसमें प्राचीन काल की कई ऐतिहासिक वस्तुओं को दिखाया गया था. हसायन, सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र का खास इलाका है. यहां बड़े पैमाने पर फूलों की खेती होती है. उनसे इत्र बनाया जाता है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में यहां का इत्र कन्नौज की टक्कर नहीं ले सका है.

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