साल 2022 में उत्तर प्रदेश की विधानसभा के चुनाव होने हैं. जिसको लेकर सभी राजनीतिक दलों में हलचल शुरू हो गई है. साल 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने भारी बहुमत के साथ विरोधियों का मुंह बंद कर दिया था. मोदी लहर के सामने समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस बड़ी मुश्किल से कुछ ही सीटें जीत सकी थी.  चुनाव जीतने के बाद योगी आदित्यनाथ को बीजेपी ने यूपी का मुख्यमंत्री चुना था. इस बार यूपी की 18वीं विधानसभा के चुनाव में विपक्षी दल सत्ता में वापसी करने की उम्मीद में चुनाव में उतरेंगे, वहीं बीजेपी अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए. अब बात करते हैं राजधानी दिल्ली से सटी नोएडा विधानसभा सीट की. 

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क्यों कहा जाता है श्रापित सीट 

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में आने वाले नोएडा विधानसभा क्षेत्र में फिलहाल बीजेपी का विधायक है. दिल्ली से सटी यह विधानसभा सीट काफी अहम है. इस सीट को यूपी के राजनीतिक इतिहास की सबसे बदकिस्मत सीट कहा जाता है. उत्तर प्रदेश का प्रदेश का जो भी मुख्यमंत्री यहां आता है. वह अगला चुनाव नहीं जीत पाता. कई नेता किस्मत के खेल पर भरोसा रखते हैं तो कई नेता नहीं.

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पिछले चुनाव में किसकी हुई थी जीत 

साल 2017 के चुनाव की बात करें तो नोएडा विधानसभा सीट पर बीजेपी ने कमल खिलाया था. यहां से बीजेपी के प्रत्याशी और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह ने जीत दर्ज की है. पंकज सिंह ने सपा के प्रत्याशी सुनील चौधरी को 1,03952 वोटों से हराया है. पंकज को 1,62310 वोट प्राप्त हुए थे वहीं दूसरे नंबर पर रहे सपा के सुनील चौधरी को 58358 वोट मिले थे. साल 2012 में इस सीट पर बीजेपी के महेश शर्मा विजयी रहे थे. 

इस सीट पर मतदाता 

साल 2017 के आंकड़ों के अनुसार नोएडा विधानसभा सीट पर कुल 428259 वोटर हैं जिनमें से 249289 मतदाता पुरुष वहीं 178970 मतदाता महिलाएं हैं. 

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