राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सदन में कुछ विपक्षी सांसदों के मेज पर चढ़ने पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बुधवार को कहा कि वह "लोकतंत्र के मंदिर" में बेअदबी के कारण सो नहीं पाए. नायडू ने मंगलवार की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें 'अगस्त सदन' में उकसावे या निचले स्तर का कारण खोजने के लिए संघर्ष करना पड़ा.

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बता दें कि कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह मंगलवार को टेबल पर चढ़ गए थे. बाजवा ने तो रूलबुक चेयर पर फेंकी थी. भावुक नायडू ने कहा कि जिस टेबल एरिया में सदन के अधिकारी और पत्रकार, महासचिव और पीठासीन अधिकारी बैठे होते हैं, उसे सदन का पवित्र गर्भगृह माना जाता है. 

वेंकैया नायडू ने कहा, "मैं इस बात से बेहद दुखी हूं कि कुछ सदस्यों ने मॉनसून सेशन में बुरी तरह उपद्रव किया है. आपकी ओर से किसी भी मसले पर बहस की जा सकती है और राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन जिस तरह से उपद्रव किया गया था, वह दुख पहुंचाने वाला है." हालांकि, वेंकैया नायडू की इस टिप्पणी के दौरान भी सदन में लगातार हंगामा जारी रहा. इस पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि चेयर से कुछ कहा जा रहा है तो फिर सुन लीजिए.

राज्यसभा में मंगलवार को जब सदन में नए कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन पर चर्चा शुरू हुई तो विपक्षी सांसद अधिकारियों की मेज पर चढ़ गए, काला कपड़ा लहराया और फाइलें फेंक दीं. कई सांसद उस मेज पर खड़े थे जहां संसदीय कर्मचारी कुर्सी के ठीक नीचे बैठते हैं, जबकि अन्य विपक्षी सांसद सरकार विरोधी नारे लगाते हुए उसके चारों ओर भीड़ लगाकर खड़े हो गए. 

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सूत्रों की मानें तो राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू कल के हंगामे को लेकर विपक्षी सांसदों के खिलाफ एक्शन ले सकते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सदन के नेता पीयूष गोयल और अन्य भाजपा सांसदों ने आज सुबह नायडू से मुलाकात की है. 

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