ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जबर्दस्त वापसी से अपने जज्बे का शानदार नमूना पेश करके उत्साह से ओतप्रोत भारतीय टीम अब विराट कोहली की अगुवाई में शुक्रवार से शुरू होने वाली चार टेस्ट मैचों की सीरीज में इंग्लैंड की टीम का सामना करेगी जिसमें दोनों टीमों की निगाहें विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल में जगह बनाने पर टिकी होंगी.

कोविड-19 के कारण लंबे ब्रेक के कारण भारत में एक साल से भी अधिक समय बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी होगी और इसके लिये उसका प्रतिद्वंद्वी इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम है जिसकी अगुवाई जो रूट जैसा धाकड़ बल्लेबाज कर रहा है.

रूट अपना 100वां टेस्ट मैच खेलेंगे. उनके पास वर्तमान समय के सबसे मजबूत तेज गेंदबाजी आक्रमण और इस खेल का सर्वश्रेष्ठ आलराउंडर है. लेकिन भारतीय टीम को कोहली की वापसी से मजबूती मिली है जो ऑस्ट्रेलिया में पहले टेस्ट के बाद पितृत्व अवकाश के बाद स्वदेश लौट गये थे. भारत ने इसके बाद ऑस्ट्रेलिया में चमत्कारिक प्रदर्शन करके सीरीज 2-1 से जीती थी जबकि इंग्लैंड की टीम श्रीलंका से 2-0 से क्लीन स्वीप करके यहां पहुंची है. इसलिए इस सीरीज में मुकाबला रोमांचक होने की संभावना है.

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भारत का सामना हालांकि उस इंग्लैंड से है जो पिछले 15 वर्षों में भारत में टेस्ट सीरीज (2012) जीतने वाली एकमात्र टीम है. इंग्लैंड के पास रूट के रूप में ऐसा बल्लेबाज है जो जानता है कि उपमहाद्वीप की पिचों पर स्पिनरों का कैसे सामना करना हे. श्रीलंका में हाल में दो बड़े शतक बनाकर उन्होंने इसे साबित किया था.

जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड जैसे गेंदबाज रोहित शर्मा के धैर्य और शुभमन गिल की तकनीक की परीक्षा लेने के लिये तैयार हैं. जोफ्रा आर्चर अपनी शॉर्ट पिच गेंदों से भारतीय बल्लेबाजों को परेशान करने की कोशिश करेंगे और अगर पुरानी गेंद रिवर्स स्विंग लेती है तो बेन स्टोक्स उसका फायदा उठाना चाहेंगे.

भारतीय उप कप्तान और ऑस्ट्रेलिया में कोहली की अनुपस्थिति में टीम की अगुवाई करने वाले अजिंक्य रहाणे ने कहा, ‘‘आस्ट्रेलिया की श्रृंखला अब अतीत की बात है. हम इंग्लैंड की टीम का सम्मान करते हैं और एक बार में एक मैच पर ध्यान देंगे. ’’

जाहिर है कि भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में जीत के बाद इंग्लैंड के खिलाफ किसी तरह की आत्ममुग्धता से बचना चाहेगी. ऑस्ट्रेलिया की तेज पिचों पर ठोस बल्लेबाजी के बाद अब भारतीयों को चेन्नई की लाल मिट्टी वाली धीमी पिच से सामंजस्य बिठाना होगा. इस पिच में पहले दिन उछाल होता है लेकिन तीसरे दिन से यह स्पिनरों को मदद देना शुरू कर देती है. ऑस्ट्रेलिया में कई गेंदें अपने शरीर पर झेलने वाले चेतेश्वर पुजारा इस तरह की पिचों पर बड़े स्कोर खड़ा करना चाहेंगे क्योंकि यहां गेंद लगातार कमर के ऊपर नहीं जाती है.

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भारतीय बल्लेबाजों को इंग्लैंड के धीमी गति के गेंदबाजों के सामने खेलने में बहुत दिक्कत नहीं आनी चाहिए. मोईन अली को छोड़कर इंग्लैंड के दोनों स्पिनरों डॉम बेस और जैक लीच को भारत के दमदार बल्लेबाजों को गेंदबाजी करने का अनुभव नहीं है. जब गेंद पुरानी हो जाएगी तब ऋषभ पंत जैसे विस्फोटक बल्लेबाज उनकी बखिया उधेड़ सकते हैं.

भारत को अगर डब्ल्यूटीसी फाइनल में जगह बनाकर लार्ड्स में न्यूजीलैंड का सामना करना है तो उसे अच्छे गेंदबाजी संयोजन के साथ उतरना होगा. जसप्रीत बुमराह का यह घरेलू सरजमीं पर पहला टेस्ट मैच होगा जबकि वह 2018 में ही टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण कर चुके हैं.

इशांत शर्मा ने अपना आखिरी टेस्ट मैच लगभग एक साल पहले खेला था. उन्होंने चोटिल होने और कोविड-19 के कारण लंबे समय से लाल गेंद से कोई मैच नहीं खेला है. लेकिन मोहम्मद सिराज का आस्ट्रेलिया में शानदार प्रदर्शन नहीं भुलाया जा सकता है. ऐसे में इशांत और सिराज में से किसे चुनना है यह फैसला करना आसान नहीं होगा.

भारत तीन स्पिनरों के साथ उतर सकता है और अक्षर पटेल को अपना पहला टेस्ट मैच खेलने का मौका मिल सकता है. ब्रिस्बेन टेस्ट में पदार्पण करने वाले वाशिंगटन सुंदर और पटेल में से किसी एक को अंतिम एकादश में लिये जाने की संभावना है.

रविचंद्रन अश्विन का चयन तय है जबकि कोहली कलाई के स्पिनर के तौर पर कुलदीप यादव को रखना पसंद करेंगे.

टीम इस प्रकार हैं :

भारत: विराट कोहली (कप्तान), अजिंक्य रहाणे (उप-कप्तान), रोहित शर्मा, शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), रविचंद्रन अश्विन, जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा, मोहम्मद सिराज, वाशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, हार्दिक पंड्या, मयंक अग्रवाल, केएल राहुल, ऋद्धिमान साहा, शार्दुल ठाकुर.

इंग्लैंड: जो रूट (कप्तान), ज़ैक क्रॉली, डोमिनिक सिबली, रोरी बर्न्स, ओली पोप, डैन लॉरेंस, बेन स्टोक्स, जोस बटलर (विकेटकीपर), बेन फ़ॉक्स, मोईन अली, क्रिस वोक्स, जोफ्रा आर्चर, जेम्स एंडरसन, स्टुअर्ट ब्रॉड, डोमिनिक बेस, जैक लीच, ऑली स्टोन.

मैच सुबह नौ बजकर 30 मिनट से शुरू होगा.