तालिबान का दावा है कि उसने पंजशीर घाटी पर कब्जा कर लिया है, वह क्षेत्र जहां अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह 15 अगस्त को काबुल के कब्जे के बाद समूह के खिलाफ गठबंधन करने के लिए पनाह ली है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने तालिबान के एक कमांडर के हवाले से कहा है, "उपद्रवियों को हरा दिया गया है और अब पंजशीर हमारे कब्जे में हैं." अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से पंजशीर इकलौता ऐसा प्रांत है जहां तालिबान कब्जा नहीं कर सका है

जब तालिबान लड़ाके काबुल में गोलियों की बौछार के साथ कथित जीत का जश्न मना रहे थे, तब सालेह ने कहा कि "प्रतिरोधी बलों" ने अपनी जमीन नहीं छोड़ी है.  बीबीसी वर्ल्ड के एक पत्रकार द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक वीडियो क्लिप में उन्होंने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम एक मुश्किल स्थिति में हैं. हम पर तालिबान हमला कर रहा है." 

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15 अगस्त को तालिबान के काबुल पर कब्जे से पहले ही राष्ट्रपतिअशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए थे, जिसके बाद सालेह ने संविधान के नियमों का हवाला देते हुए खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया था.

पंजशीर काबुल से सिर्फ 150 किमी दूर हिंदू कुश पहाड़ों में बसा है, और इसकी प्राकृतिक सुरक्षा तालिबान के लिए 1996 और 2001 के बीच देश पर उसके शासन के दौरान अहमद शाह मसूद के नेतृत्व वाले 'नॉर्दर्न अलायन्स' से घाटी को हथियाने के लिए अभेद्य साबित हुई थी. 2001 में अलकायदा ने अहमद शाह मसूद की हत्या कर दी थी. 

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अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद अभी पंजशीर घाटी के नेता हैं. नॉर्दन एलायंस में उनके साथ पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह और बल्ख प्रांत के पूर्व गवर्नर की सैन्य टुकड़ी भी है. कई अफगान नेशनल आर्मी के सैनिक भी यहां इकट्ठा हुए हैं.

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