पश्चिम बंगाल चुनाव में गोत्र को लेकर राजनीति शुरू हो गई है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को गोत्र की चर्चा करते हुए कहा कि, मैंने मंदिर का दौरा किया जहां पुजारी ने मेरा गोत्र पूछा, मैंने कहा मां, माटी, मानुष. यह मुझे मेरी त्रिपुरा के त्रिपुरेश्वरी मंदिर की याद दिलाता है, जहां पुजारी ने मुझसे मेरा गोत्र पूछा और मैंने मां, माटी, मानुष कहा था, वास्तव में मैं शांडिल्य हूं.

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वहीं, ममता बनर्जी के बयान पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, मुझे तो कभी गोत्र बताने की ज़रूरत नहीं पड़ी, मैं तो लिखता हूं. लेकिन ममता बनर्जी चुनाव हारने के डर से गोत्र बताती हैं. ममता बनर्जी अब आप मुझे बात दीजिए कि कहीं रोहिंग्यों और घुसपैठियों का गोत्र भी शांडिल्य तो नहीं है. उनका हारना तय है.

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तो चलिए हम आपको बताते हैं कि गोत्र क्या होता है. सनातन धर्म में गोत्र का बहुत महत्व होता है. वैसे गोत्र का शाब्दिक अर्थ काफी व्यापक है. लेकिन विद्वानों के अनुसार गो का अर्थ इंद्रियां और त्र का अर्थ रक्षा करना होता है. ये ऋषि कि ओर संकेत करता है. सामान्य रूप से गोत्र को ऋषि परंपरा से संबंधित माना गया है.

ऐसा माना जाता है कि चार ऋषियों के नाम से गोत्र की परंपरा शुरू हुई. इसमें अंगिरा,कश्यप,वशिष्ठ और भगु हैं. लेकिन बाद में इसमें कई और भी जोड़े गए.

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