कोरोना वायरस महामारी के दौर में ओलंपिक खेलों का आयोजन किया जा रहा है. इस महाकुंभ को पिछले साल महामारी की वजह से ही टाल दिया गया था. लेकिन आखिरकार टोक्यो ओलंपिक 23 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. कोरोना संक्रमण का खतरा टला नहीं है लेकिन फिर भी ओलंपिक खेल और खिलाड़ियों के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं. जिससे उनका बचाव हो सके. वहीं, इस दौरान खिलाड़ी अगर कोरोना की चपेट में आते हैं तो उनके लिए कुछ आसान नियम बनाए गए हैं, जिससे उन्हें आगे खेलने का मौका मिलेगा.

कोरोना महामारी की वजह से ओलंपिक खेलों को देखने के लिए दर्शकों की मौजूदगी पर पाबंदी लगा दी गई है. वहीं, खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए एक बायो-बबल बनाया गया है. हालांकि, कोरोना के संक्रमण का खतरा इससे भी टलता नहीं दिख रहा है.

यह भी पढ़ेंः India at Tokyo 2020: ओलंपिक में जगह बनाने वाले भारतीय खिलाड़ियों की पूरी लिस्ट

ऐसे में नचाही घटनाओं से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) और अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ ने टोक्यो 2020 के लिए खेल-संबंधित विनियम (SSR-स्पोर्ट-स्पेसिफिक रेगुलेशन्स) बनाए हैं. SSR विभिन्न खेलों में कोई भी कोविड पॉजिटिव केस पाए जाने पर जमीनी स्तर के नियम निर्धारित करने का काम करेगा. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी एथलीट 'अयोग्य' यानी ‘डिसक्वालिफाइड’ के रूप में वर्गीकृत न हो. इसके बजाय उन्हें 'डिड नॉट स्टार्ट’ यानी ‘शुरू नहीं कर सकते' के तौर पर सूचीबद्ध किया जाएगा. हालांकि, हर खेल के लिए अलग-अलग नियम रहेंगे.

तीरंदाजी- तीरंदाज कोविड पॉजिटिव होने की वजह से प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ रहता है, तो उन्हें DNS (डिड नॉट स्टार्ट) यानी ‘शुरू नहीं कर सकते’ के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा और उसका प्रतिद्वंद्वी बाई मिलने के साथ अगले राउंड में पहुंच जाएगा. अगर कोई तीरंदाज फाइनल से पहले कोविड पॉजिटिव पाया जाता है तो उन्हें पिछले राउंड में बाहर हुए तीरंदाज से बदल दिया जाएगा.

यह भी पढ़ेंः टोक्यो ओलंपिक में मध्यप्रदेश के 12 खिलाड़ी करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

बैडमिंटन- एक शटलर अगर COVID-19 टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है तो उसे भी 'DNS' के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा. अगर किसी मैच के बाद ऐसा होता है, तो खिलाड़ी अपना नाम 'वापस' ले लेगा, और प्रतिद्वंद्वी को अगले राउंड के लिए बाई मिल जाएगा.

बॉक्सिंग- एक बॉक्सर को तब 'DNS' के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा और उसे ‘वॉकओवर’ दिया जा सकता है अगर उसे कोविड संक्रमण प्रतियोगिता शुरू होने के बाद होता है. अगर फाइनल से पहले ऐसा होता है, तो कोविड पॉजिटिव बॉक्सर को सिल्वर मेडल और उसके प्रतिद्वंद्वी को गोल्ड मेडल दिया जाएगा.

एथलेटिक्स- ट्रैक-एंड-फील्ड इवेंट में कोई भी प्रतिभागी COVID-19 टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है तो उन्हें 'DNS' के के तौर पर चिह्नित किया जाएगा और उनकी जगह पर पिछले राउंड में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले एथलीट को शामिल किया जाएगा. जिस भी राउंड से एथलीट COVID-19 की वजह से बाहर होगा, उसे उस एथलीट के लिए फाइनल रिजल्ट माना जाएगा.

गोल्फ- कोविड पॉजिटिव गोल्फर को 'DNS' के तौर पर सूचीबद्ध किया जाएगा और यदि प्रतियोगिता शुरू होने के बाद ऐसा होता है, तो माना जाएगा कि गोल्फर ने अपना नाम 'वापस' ले लिया. गोल्फर के नाम वापस लेने के वक्त तक के परिणाम को अंतिम माना जाएगा.

हॉकी- नॉकआउट चरणों में होता है, तो विरोधी टीम अगले राउंड में पहुंच जाएगी और प्रभावित टीम की अंतिम स्थिति उस राउंड के अनुसार निर्धारित की जाएगी जिससे वह बाहर निकलती है. यदि फाइनल में कोई भी टीम हिस्सा लेने में असमर्थ रहती है, तो वह जिस टीम को सेमीफाइनल में हराती है, उनकी बजाय वह फाइनल में खेलेगी और सेमीफाइनल में हारने वाली दूसरी टीम कांस्य पदक जीतेगी

शूटिंग- COVID-19 टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने पर किसी भी शूटर को 'DNS' के तौर पर सूचीबद्ध किया जाएगा और व्यक्तिगत इवेंट में कोई भी प्रतिस्थापन नहीं होगा. मिक्स्ड टीम इवेंट में यदि कोई सदस्य कोविड पॉजिटिव पाया जाता है तो वह देश प्रभावित शूटर की जगह पर दूसरे शूटर से बदलने का विकल्प चुन सकता है.

कुश्ती- COVID-19 पॉजिटिव रेसलर को 'DNS' के तौर पर सूचीबद्ध किया जाएगा और उसके प्रतिद्वंद्वी को अगले दौर में बाई मिल जाएगा. यदि कोई पहलवान फाइनल में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाता है, तो सेमीफाइनल में हारने वाला पहलवान स्वर्ण पदक के लिए प्रतिस्पर्धा करेगा.

यह भी पढ़ेंः सूर्यकुमार यादव की ऑल-टाइम IPL XI में धोनी नहीं, नाराज डेविड वॉर्नर ने कही ये बात