किसान संगठनों और सरकार के बीच शुक्रवार को हुई 11वें दौर की बातचीत भी असफल रही. एक ओर सरकार किसानों की मांग मानने को तैयार नहीं है. वहीं, किसान जिद पर अड़ें हैं. सरकार के प्रस्ताव पर भी किसान नेता विचार करने को तैयार नहीं है. ऐसे में सरकार और किसानों के बीच का गतिरोध फिर से अधड़ में दिख रहा है. वहीं, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि, जब आंदोलन की पवित्रता नष्ट हो जाती है तो निर्णय नहीं होता.

कृषि मंत्री ने कहा, भारत सरकार की कोशिश थी कि वो सही रास्ते पर विचार करें जिसके लिए 11 दौर की वार्ता की गई. परन्तु किसान यूनियन क़ानून वापसी पर अड़ी रही. सरकार ने एक के बाद एक प्रस्ताव दिए. परन्तु जब आंदोलन की पवित्रता नष्ट हो जाती है तो निर्णय नहीं होता.

उन्होंने कहा, इस आंदोलन के दौरान लगातार ये कोशिश हुई कि जनता के बीच और किसानों के बीच गलतफहमियां फैलें. इसका फायदा उठाकर कुछ लोग जो हर अच्छे काम का विरोध करने के आदि हो चुके हैं, वे किसानों के कंधे का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर सकें.

भारत सरकार PM मोदी जी के नेतृत्व में किसानों और गरीबों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है और रहेगी... विशेष रूप से पंजाब के किसान और कुछ राज्यों के किसान कृषि क़ानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं.

नरेंद्र तोमर ने कहा, वार्ता के दौर में मर्यादाओं का तो पालन हुआ परन्तु किसानों के हक़ में वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो, इस भाव का सदा अभाव था इसलिए वार्ता निर्णय तक नहीं पहुंच सकी.

हमने किसान यूनियन को कहा कि जो प्रस्ताव आपको दिया है- 1 से 1.5 वर्ष तक क़ानून को स्थगित करके समिति बनाकर आंदोलन में उठाए गए मुद्दों पर विचार करने का प्रस्ताव बेहतर है, उसपर फिर से विचार करें. हमने कहा कि आज वार्ता को पूरा करते हैं आप लोग अगर निर्णय पर पहुंच सकते हैं तो आप लोग कल अपना मत बताइए. निर्णय घोषित करने पर आपकी सूचना पर हम कहीं भी इकट्ठा हो सकते हैं.