अमेरिका की अफगानिस्तान से वापसी के बाद तालिबान ने सालों से युद्ध त्रस्त देश की सत्ता में वापसी कर ली है. तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद से जिस शख्स की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, उसका नाम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (Taliban Commander Mullah Abdul Ghani Baradar) है. मुल्ला अब्दुल गनी बरादर, तालिबान का सह-संस्थापक है और उसके अफगानिस्तान के अगले राष्ट्रपति बनने की बहुत ठोस संभावना है.

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मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का जन्म साल 1968 में अफगानिस्तान के उर्जगान प्रान्त में हुआ था. उसका बचपन सोवियत संघ समर्थित सरकार के खिलाफ संघर्ष में बीता था. मुल्ला अब्दुल गनी बरादर, तालिबान के संस्थापक सदस्यों में से एक है. वह तालिबान के संस्थापक रहे मुल्ला मोहम्मद उमर का करीबी सहयोगी है. 1994 में तालिबान का गठन करने वाले चार लोगों में मुल्ला अब्दुल गनी बरादर भी एक था.

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मुल्ला अब्दुल गनी, तालिबान में नंबर दो की हैसियत रखता है और वह इस समय इस आतंकी संगठन का राजनीतिक हेड है. 1996 में मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को तालिबान शासन में उप रक्षा मंत्री बनाया गया था.  दोहा में जो अमेरिका-तालिबान और अन्य देशों के बीच समझौता हुआ उसपर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने ही हस्ताक्षर किए. 

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2010 में पाकिस्तान ने मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन, 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश और तालिबान के साथ डील के बाद पाकिस्तान ने उसे रिहा कर दिया.  

तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद सामने आए एक वीडियो में हवाईअड्डे पर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का काबुल में जोरदार स्वागत देखने को मिलता है. उसके आसपास भीड़ है और पता चल रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे का मास्टरमाइंड वो ही है.

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