प्रमोद भगत (Pramod Bhagat), भारत के पैरा एथलीट हैं, जोकि बैडमिंटन खेलते हैं. प्रमोद भगत ने टोक्यो पैरालंपिक में भारत के लिए मेंस सिंगल्स के SL3 केटेगरी में पदक जीता है.

प्रमोद भगत का जन्म 4 जून 1988 को ओडिशा में हुआ था. पांच वर्ष की उम्र में पोलियो के चलते उनका बायां पैर विकृत हो गया था. उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में चार गोल्ड मेडल समेत 45 अंतरराष्ट्रीय मेडल जीते हैं. उन्होंने पिछले आठ वर्षों में बीडब्ल्यूएफ पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप के मेंस सिंगल्स में दो स्वर्ण पदक और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता है. वहीं मेंस डबल्स में दो गोल्ड और एक रजत अपने नाम किया है. 

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बासेल में 2019 संस्करण में, भगत ने सिंग्लस और डबल्स दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते थे. 2018 एशियाई पैरा खेलों में, उन्होंने दो पदक जीते - एक स्वर्ण और एक कांस्य. उन्होंने 2019 में IWAS वर्ल्ड गेम्स में दो स्वर्ण पदक और एक रजत के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया था. 

उन्होंने 2019 में स्विट्जरलैंड के बासेल में BWF पैरा वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीते.  इस साल, भगत ने अप्रैल में दुबई पैरा बैडमिंटन टूर्नामेंट में दो स्वर्ण पदक जीते थे.

टोक्यो पैरालंपिक्स में किया कमाल

मौजूदा विश्व चैंपियन प्रमोद भगत (Pramod Bhagat) ने भी शनिवार को बैडमिंटन स्पर्धा के पुरुष एकल फाइनल में प्रवेश किया, लेकिन इसी केटेगरी में खेल रहे मनोज सरकार की उम्मीदों पर पानी फिर गया जब उन्हें टोक्यो पैरालिंपिक में एसएल3 वर्ग के दूसरे सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा. 

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