प्रवीण कुमार (Praveen Kumar) दिव्यांग भारतीय एथलीट हैं. 18 साल के प्रवीण कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक्स 2020 के मेंस हाई जंप T64 कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता है. प्रवीण ने अपने डेब्यू पैरालंपिक्स में ही मेडल जीतने का कारनाम किया है. 

प्रवीण कुमार, उत्तर प्रदेश के गौतम बुध नगर के जेवर कस्बे के रहने वाले हैं. स्कूल में वह वॉलीबॉल खेलते थे और ऐसा करते समय उन्हें एहसास हुआ कि वह आसानी से ऊंची छलांग लगा सकते हैं. कुमार ने टीओआई को बताया, "मैं स्कूल में वॉलीबॉल खेलता था और मेरी छलांग अच्छी थी. एक बार मैंने स्कूल में ऊंची कूद प्रतियोगिता में भाग लिया और अच्छा प्रदर्शन किया, मैंने उसके बाद प्रशिक्षण शुरू किया."

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प्रवीण कुमार ने ओलंपिक के लिए बहुत कठिन ट्रेनिंग की, लेकिन COVID-19 महामारी के बाद लगाए गए लॉकडाउन के चलते उनकी ट्रेनिंग में काफी दिक्कतें आईं. टोक्यो जाने से पहले कुमार ने कहा था कि उनका लक्ष्य कम से कम 2.05 मीटर की छलांग लगाना है. बता दें कि कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक्स में एशियाई रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2.07 मीटर की ऊंचाई लांघी. 

प्रवीण ने जूनियर विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता और 2019 में सीनियर विश्व चैंपियनशिप में चौथे स्थान पर रहे थे. उन्होंने वर्ल्ड ग्रां प्री में भी स्वर्ण पदक जीता था और 2.05 मीटर की छलांग के साथ एशिया रिकॉर्ड बनाया था. 

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2.07 की ऊंचाई लांघकर जीता सिल्वर 

टोक्यो पैरालंपिक्स के मेंस हाई जंप के T64 कैटेगरी में ग्रेट ब्रिटेन के जोनाथन ब्रूम एडवर्ड ने 2.10 मीटर की ऊंचाई लांघी, वहीं पहली बार पैरालंपिक्स में हिस्सा ले रहे भारत के प्रवीण कुमार 2.07 की ऊंचाई ही लांघ सके. पोलैंड के एथलीट Maciej Lepiato 2.04 की ऊंचाई लांघकर तीसरे स्थान पर रहे. प्रवीण ने सिल्वर मेडल जीतने के लिए एशियाई रिकॉर्ड तोड़ा है. कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक्स में भारत को 11वां मेडल दिलाया था. 

T64 वर्गीकरण एक पैर के विच्छेदन वाले एथलीटों के लिए है, जो खड़े होने की स्थिति में प्रोस्थेटिक्स के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं.

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कुमार, स्पोर्ट्स क्लास T44 के एथलीट हैं, लेकिन वो T64 में हिस्सा लेने के लिए योग्य हैं. एक पैर की कमी, पैर की लंबाई में अंतर, बिगड़ी हुई मांसपेशियों की शक्ति या पैरों में गति की निष्क्रियता वाले एथलीट T64 में हिस्सा लेने के योग्य होते हैं.

कुमार की विकलांगता, जो जन्मजात होती है, उन हड्डियों को प्रभावित करती है जो उसके कूल्हे को उसके बाएं पैर से जोड़ती हैं.