पंजाब में मुख्यमंत्री पद के लिए सुखजिंदर सिंह रंधावा को लेकर सहमति बन गई है. सभी विधायकों ने सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम आगे किया है. हालांकि, उनके नाम पर आलाकमान की ओर से पुष्टि नहीं की गई है.

सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस पार्टी के विरिष्ट नेता है. वह पंजाब विधानसभा में डेरा बाबा नानक सीट से विधायक है. वह पंजाब में मंत्री पद संभाल चुके हैं.  

उनके पिता का नाम संतोख सिंह है, जिन्होंने दो बार पंजाब कांग्रेस के प्रमुख के रूप में कार्य किया और अपने समय के सबसे वरिष्ठ कांग्रेसियों में से एक थे. सुखजिंदर ने अपनी मैट्रिक की शिक्षा 1975 में चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल से पूरी की.

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रंधावा ने पहली बार 2002 में फतेहगढ़ चुरियन से अकाली दल के निर्मल सिंह कहलों को हराकर पंजाब विधानसभा के लिए सफलतापूर्वक चुनाव लड़ा था. 2012 में, वह नए निर्वाचन क्षेत्र डेरा बाबा नानक से चुने गए.

वह उन 42 कांग्रेस विधायकों में से एक थे, जिन्होंने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) जल नहर को असंवैधानिक रूप से समाप्त करने के भारत के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के विरोध में अपना इस्तीफा सौंप दिया था.

अब पंजाब में अमरिंदर सिंह के सीएम पद से इस्तीफे के बाद सुखजिंदर सिंह के नाम पर मुहर लगी है. हालांकि, सुखजिंदर सिंह ने कहा है कि उनकी कभी किसी पद की लालसा नहीं रही है.  रंधावा ने कहा कि उन्होंने और उनके परिवार ने कभी किसी पद की लालसा नहीं है.

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वहीं, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले अमरिंदर सिंह पर इशारों-इशारों में निशाना साधते हुए रंधावा ने कहा, ‘‘एक मुख्यमंत्री तभी तक अपने पद पर रहता है जब तक उसकी पार्टी और राज्य की जनता उसके साथ खड़ी होती है.

अमरिंदर सिंह के अपमानित महसूस करने संबंधी बयान पर उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ने पांच मुख्यमंत्री बदले हैं. कांग्रेस में भी कुछ मुख्यमंत्री बदले गए हैं. कांग्रेस में अमरिंदर साढ़े नौ साल तक मुख्यमंत्री रहे. मेरा मानना है कि उनको जितना सम्मान मिला, उतना किसी मुख्यमंत्री को नहीं मिला.’’

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