त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके पीछे की क्या वजह इसका कोई साफ-साफ जवाब तो नहीं है लेकिन पिछले कुछ समय से देहरादून से लेकर दिल्ली तक पार्टी के अन्दर चल रहे सियासी मंथन को देखकर इसका पता लगाया जा सकता है. 

अठारह मार्च 2017 को शपथ लेने के बाद से मंत्रिमंडल विस्तार सहित कुछ बातों को लेकर बीजेपी विधायकों में असंतोष की बातें गाहे बगाहे उठती रही लेकिन प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने शनिवार शाम तब जोर पकड़ लिया जब रमन सिंह और पार्टी मामलों के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार सिंह अचानक देहरादून पहुंचे और कोर ग्रुप की बैठक ली.

पार्टी की राज्य इकाई की कोर ग्रुप की यह बैठक पहले से प्रस्तावित नहीं थी और यह ऐसे समय बुलाई गई जब प्रदेश की नई बनी ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में राज्य विधानसभा का महत्वपूर्ण बजट सत्र चल रहा था.

बैठक की सूचना मिलने पर रावत को तुरंत गैरसैंण से वापस देहरादून आना पड़ा. आनन-फानन में बजट पारित करा कर सत्र भी अनिश्चितकाल के लिए समाप्त कर दिया गया और बीजेपी विधायकों को भी तत्काल गैरसैंण से देहरादून बुला लिया गया.

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दो घंटे से भी ज्यादा समय तक चली कोर ग्रुप की बैठक में प्रदेश के ज्यादातर सांसद और प्रदेश संगठन से जुड़े अहम नेता मौजूद रहे. सोमवार को भी मुख्यमंत्री रावत के गैरसैंण और देहरादून में कई कार्यक्रम प्रस्तावित थे लेकिन आलाकमान के बुलावे पर उन्हें दिल्ली जाना पड़ा जहां से वह मंगलवार को लौटे और मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया.

पार्टी सूत्रों ने बताया कि रमन सिंह ने कोर ग्रुप की बैठक में मौजूद हर सदस्य से अलग-अलग बातचीत की. बाद में सिंह मुख्यमंत्री के सरकारी आवास भी गए, जहां करीब 40 पार्टी विधायक मौजूद थे. कोर ग्रुप की बैठक के बाद सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय भी गए. इसके बाद प्रदेश से लेकर राजधानी दिल्ली तक राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई थीं. सूत्रों के मुताबिक सिंह और गौतम ने राज्य से लौटने के बाद प्रदेश नेताओं से हुई रायशुमारी के संबंध में नड्डा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी.

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प्रदेश के एक धड़े के नेताओं के रावत के नेतृत्व से नाराज होने की खबरें थीं और उनका मानना था कि रावत के नेतृत्व में पार्टी का भविष्य ठीक नहीं दिख रहा.

रावत उत्तराखंड के नौवें मुख्यमंत्री हैं. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली भारी सफलता के बाद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य की कमान रावत को सौंपने का फैसला किया था. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 75 में से 57 सीटों पर अपना कब्जा जमाया था. रावत राज्य में भाजपा के पांचवें मुख्यमंत्री हैं.

बुधवार सुबह 10 बजे राज्य पार्टी मुख्यालय में विधानमंडल दल की बैठक बुलाई गई है जिसमें सभी विधायकों की मौजूदगी में नए नेता का चयन किया जाएगा. बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छत्तीसगढ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में मौजूद रहेंगे. 

इनपुट्स PTI से

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