जब भी 'प्रेम' की बात होती है तो राधा-कृष्ण का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. सदियों से हम राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी पढ़ते-सुनते चले आ रहे हैं, जिसके बाद अक्सर मन में सवाल आता है कि श्रीकृष्ण ने राधा से विवाह क्यों नहीं किया? इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने Opoyi से बातचीत में कहा कि राधा-कृष्ण का प्रेम आलौकिक था. आम प्रेमी-प्रेमिका वाला प्रेम ये नहीं था. ये प्रेम भक्त और भगवान वाला था. आत्मा वाला प्रेम था. इसलिए शादी का सवाल ही पैदा नहीं होता.

इससे जुड़ी कई व्याख्याएं भी मिलती हैं. उनमें से एक ये है कि राधा को कृष्ण अपनी आत्मा मानते थे. कोई अपनी आत्मा से विवाह कैसे कर सकता है. श्रीकृष्ण का आशय यही था कि वह और राधा तो एक ही हैं, अलग-अलग नहीं.

एक व्याख्या ये भी दी जाती है कि राधा जानती थी कि श्रीकृष्ण भगवान हैं. उनकी श्रद्धा कृष्ण के प्रति भक्त और भगवान वाली थी. वह भक्ति इतनी गहरी थी कि कुछ लोग भौतिक प्रेम समझ लेते हैं. श्रीकृष्ण की भक्ति में राधा लीन हो चुकी थीं. उनका अस्तित्व श्रीकृष्णमय हो चुका था. ऐसे में विवाह का सवाल पैदा ही नहीं होता.

वहीं रुक्मिणी ने भी कृष्ण को पाने के लिए काफी तपस्या की थी. श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी से विवाह किया, लेकिन राधा के साथ रिश्ते के लिए उन्हें किसी बंधन की जरूरत नहीं थी. वहीं श्रीकृष्ण से राधा बचपन में ही मिली थीं. वह कृष्ण के दैवीय गुणों से परिचित थीं. वह जब तक पृथ्वी पर रहीं श्रीकृष्ण की स्मृतियों के साथ रहीं.

ब्रह्मवैवर्त पुराण के मुताबिक- राधा को एक श्राप के कारण कृष्ण का वियोग सहना पड़ा था. इसी श्राप के कारण 100 साल बाद राधा-कृष्ण ने एक-दूसरे के दर्शन किए थे. इसी पुराण के मुताबिक- दोनों एक-दूसरे के पूजनीय हैं और उन दोनों में कोई भेद नहीं है. राधा का पृथ्वी पर विवाह भी छाया रूप में ही रायाण वैश्य के साथ हुआ था.