नए कृषि कानूनों को लेकर किसान सड़क पर है. भारत बंद के तहत आज देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं. सरकार बार-बार कह रही है कि किसानों को भड़काया जा रहा है, जबकि ये कानून किसानों की समृद्धि के लिए हैं. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक के बाद एक ट्वीट करके कई बार कहा है कि मंडियां और MSP जारी रहेंगी और किसान अपनी मर्जी से अपनी फसल कहीं भी बेच सकते हैं. आइये प्वाइंट्स में समझते हैं कि सरकार का क्या कहना है और किसान क्यों विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं?

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्वीट कर दी है ये जानकारियां

1. कृषकों को व्यापारिक कंपनियों प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों से सीधे जोड़ना.

2. कृषि करार के माध्य से बुवाई से पूर्व ही किसान को उसकी उपज के दाम निर्धारित करना.

3.बुवाई से पूर्व किसान को मूल्य का आश्वासन

4.दाम बढ़ने पर न्यूनतम मूल्य के साथ अतिरिक्त लाभ

5.पूर्व में ही मूल्य तय हो जाने से बाजार कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव का किसान पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा.

6. किसी भी विवाद की स्थिति में उसका निपटारा 30 दिन में वो भी स्थानीय स्तर पर.

भ्रम दूर करने के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक और ट्वीट कर ये जानकारियां दी है.

1.MSP पर पहले की तरह ही खरीद जारी रहेगी

2.किसान अपनी उपज MSP पर बेच सकेंगे

3. मंडियां समाप्त नहीं होंगी, वहां पूर्ववत व्यापार होता रहेगा.

4.इस विधेयकमें किसानों को मंडी के साथ ही अन्य स्थानों पर भी उपज बेचने का विकल्प प्राप्त होगा.

5.मंडियों में ई-नाम ट्रेंडिंग की व्यवस्था होगी.

6.इलेक्ट्रॉनिक मंचों पर कृषि उत्पादों का व्यापार बढ़ेगा, इससे पारदर्शिता आएगी और समय की बचत होगी.

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आवश्यक वस्तुओं से जुड़ा नियम

इस विधेयक में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, आलू-प्‍याज को आवश्‍यक वस्‍तुओं की सूची से हटाया जाएगा. इससे किसानों को सही मूल्य मिल सके क्योंकि बाजार में स्पर्धा बढ़ेगी.

इन कानूनों का विरोध पंजाब और हरियाणा में इसलिए अधिक हो रहा है क्योंकि पंजाब और हरियाणा में करीब 80-90 प्रतिशत अनाज किसान केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित MSP पर बेचा जाता है. किसान को आशंका है कि खुले बाजार के प्रावधान के चलते सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को खत्म कर देगी, जबकि सरकार के साफ कर चुकी है, न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की व्यवस्था खत्म नहीं करेगी. किसानों को ये भी डर है कि निजी कंपनियां न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दामों पर किसानों से अनाज खरीदेगी, जबकि सरकार की ओर से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्वीट करके सफाई दे चुके हैं, लेकिन ये कहना गलत न होगा कि सरकार नए कृषि कानूनों को सही रूप में जैसा कि सरकार दावा कर रही है, पहुंचाने में असमर्थ रही.

विरोध कर रहे किसानों की मांगें

1. प्रदर्शन कर रहे किसान तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं किसानों का कहना है कि ये तीनों बिल कृषि का निजीकरण करेंगे, इससे बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा होगा.

2. किसानों को सरकार लिखित में आश्वासन दे कि MSP और कंवेंशनल फूड ग्रेन खरीद सिस्टम खत्म नहीं होगा, सरकार इस पर अलग से विधेयक लाए.

3. बिजली प्रावधान को लेकर भी विरोध है कि सरकार बिजली वितरण प्रणाली का निजीकरण कर रही है, जिससे किसानों को सब्सिडी और फ्री बिजली सप्लाई की सुविधा खत्म हो जाएगी.